संक्षिप्त जानकारी ✅
🟢 ईस्ट बंगाल ने रिकॉर्ड 17वीं बार डूरंड कप का खिताब जीता
🟢 फ़ुटबॉल में, ईस्ट बंगाल FC ने अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी मोहन बागान को हराकर रिकॉर्ड 17वीं बार डूरंड कप जीता है।
🟢 ईस्ट बंगाल FC ने रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए, 23 अगस्त 2026 को कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में खेले गए 135वें इंडियनऑयल डूरंड कप के फ़ाइनल में अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी मोहन बागान सुपर जाइंट को 4-1 से हराया।
🟢 ईस्ट बंगाल के एडमंड लालरिंडिका ने पहले हाफ़ में शानदार हैट्रिक लगाकर टीम को जीत दिलाई। बिपिन सिंह ने 10वें मिनट में ईस्ट बंगाल के लिए पहला गोल किया, जिसके ठीक दो मिनट बाद लालरिंडिका ने बढ़त को दोगुना कर दिया।
🟢 लालरिंडिका ने 23वें मिनट में एक और गोल करके ईस्ट बंगाल को 3-0 से आगे कर दिया।
🟢 मोहन बागान के लिए मनवीर सिंह ने 33वें मिनट में एक गोल किया।
🟢 हालाँकि, ईस्ट बंगाल ने जल्द ही अपनी पकड़ मज़बूत कर ली और लालरिंडिका ने 44वें मिनट में अपनी हैट्रिक पूरी करके हाफ़-टाइम से पहले स्कोर 4-1 कर दिया।
🟢 ईस्ट बंगाल FC की 22 साल में पहली जीत
🟢 यह 22 साल में पहली बार है जब ईस्ट बंगाल ने डूरंड कप जीता है। उनकी पिछली जीत भी फ़ाइनल में मोहन बागान के ख़िलाफ़ ही आई थी - उन्होंने 2004 में दिल्ली के अंबेडकर स्टेडियम में अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी को 2-1 से हराया था, जिसमें चंदन दास ने उनके लिए दो गोल किए थे।
🟢 उन्होंने पहली बार यह टूर्नामेंट 1951 में जीता था, जो देश को ब्रिटिश शासन से आज़ादी मिलने के बाद टूर्नामेंट के आयोजन का दूसरा साल था।
🟢 डूरंड कप 2026 के बारे में
🟢 डूरंड कप 2026 का आयोजन 25 जुलाई से 23 अगस्त तक किया गया। इस ऐतिहासिक फ़ुटबॉल टूर्नामेंट के 135वें संस्करण में छह ग्रुप में कुल 24 टीमें शामिल हुईं।
🟢 डूरंड कप पहली बार 1888 में ब्रिटिश भारत के शिमला के एनाडेल में आयोजित किया गया था। इसकी शुरुआत ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड ने की थी।
🟢 शुरुआत में यह देश में तैनात ब्रिटिश सेना के जवानों के लिए एक फुटबॉल टूर्नामेंट था, जिसे बाद में आम लोगों और प्रोफेशनल क्लबों के लिए भी खोल दिया गया।
🟢 डूरंड कप 2026 के व्यक्तिगत पुरस्कार
🟢 गोल्डन बॉल: एडमंड लालरिंदिका (ईस्ट बंगाल एफसी)
🟢 गोल्डन ग्लव: विशाल कैथ (मोहन बागान एसजी)
🟢 गोल्डन बूट: अलाएद्दीन अजाराई (नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी)
पूरी जानकारी Details में निचे देखें :-
ईस्ट बंगाल ने जीता 17वां डूरंड कप: मोहन बागान को 4-1 से हराकर रचा इतिहास, एडमंड लालरिंडिका की हैट्रिक ने बदला पूरा खेल
भारतीय फुटबॉल के इतिहास में 23 अगस्त 2026 का दिन बेहद खास बन गया। कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन यानी साल्ट लेक स्टेडियम में खेले गए 135वें इंडियनऑयल डूरंड कप के फाइनल में ईस्ट बंगाल एफसी ने अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी मोहन बागान सुपर जायंट को 4-1 के बड़े अंतर से हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ ईस्ट बंगाल ने डूरंड कप का 17वां खिताब जीत लिया और प्रतियोगिता के इतिहास में सबसे अधिक खिताब जीतने के मामले में मोहन बागान की बराबरी कर ली।
ईस्ट बंगाल की इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े नायक एडमंड लालरिंडिका रहे। उन्होंने पहले हाफ में ही शानदार हैट्रिक लगाकर फाइनल की दिशा पूरी तरह बदल दी। उनके अलावा बिपिन सिंह ने एक गोल किया, जबकि मोहन बागान की ओर से मनवीर सिंह एकमात्र गोल कर सके। मैच का पहला हाफ ही 4-1 के स्कोर पर समाप्त हुआ और दूसरे हाफ में ईस्ट बंगाल ने अपने मजबूत रक्षात्मक खेल के दम पर बढ़त को बरकरार रखा।
ईस्ट बंगाल की 22 साल बाद ऐतिहासिक वापसी
ईस्ट बंगाल के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि क्लब को डूरंड कप जीतने के लिए 22 वर्षों का इंतजार करना पड़ा। उसकी पिछली डूरंड कप जीत 2004 में आई थी, जब ईस्ट बंगाल ने फाइनल में मोहन बागान को 2-1 से हराया था।
2026 के फाइनल में भी सामने वही प्रतिद्वंद्वी था, लेकिन इस बार मुकाबले का परिणाम कहीं अधिक एकतरफा रहा। ईस्ट बंगाल ने 4-1 से जीत दर्ज करके न केवल ट्रॉफी अपने नाम की बल्कि लंबे समय से चले आ रहे खिताबी इंतजार को भी समाप्त कर दिया।
इस जीत के साथ ईस्ट बंगाल ने डूरंड कप इतिहास में अपने खिताबों की संख्या 17 कर ली। मोहन बागान के पास भी 17 डूरंड कप खिताब हैं। इसलिए 2026 के बाद दोनों को इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता की सबसे सफल टीमों के रूप में देखा जा रहा है।
फाइनल में ईस्ट बंगाल का शानदार प्रदर्शन
फाइनल की शुरुआत में मोहन बागान के पास गेंद पर नियंत्रण बनाने और आक्रमण शुरू करने के कुछ अच्छे मौके थे। लेकिन ईस्ट बंगाल ने बहुत जल्द मैच का रुख अपने पक्ष में कर लिया।
मैच के 10वें मिनट में बिपिन सिंह ने ईस्ट बंगाल के लिए पहला गोल किया। इस गोल ने ईस्ट बंगाल को शुरुआती बढ़त दिलाई। इसके ठीक दो मिनट बाद एडमंड लालरिंडिका ने शानदार गोल करके स्कोर 2-0 कर दिया।
लगातार दो गोल ने मोहन बागान पर दबाव बढ़ा दिया। ईस्ट बंगाल ने इसका फायदा उठाते हुए आक्रमण जारी रखा। 22वें/23वें मिनट के आसपास लालरिंडिका ने अपना दूसरा गोल किया और ईस्ट बंगाल की बढ़त 3-0 हो गई।
मोहन बागान के लिए मनवीर सिंह ने 33वें मिनट में गोल करके वापसी की उम्मीद जगाई। स्कोर 3-1 होने के बाद मोहन बागान के पास मैच में लौटने का अवसर था।
लेकिन ईस्ट बंगाल ने दबाव में आने के बजाय फिर से हमला किया। पहले हाफ के अंतिम हिस्से में एडमंड लालरिंडिका ने अपना तीसरा गोल करके हैट्रिक पूरी कर ली। इस गोल के बाद स्कोर 4-1 हो गया और ईस्ट बंगाल ने हाफ-टाइम तक तीन गोल की मजबूत बढ़त हासिल कर ली।
एडमंड लालरिंडिका की ऐतिहासिक हैट्रिक
फाइनल में सबसे अधिक चर्चा एडमंड लालरिंडिका की हुई। उन्होंने अकेले तीन गोल करके मोहन बागान की मजबूत टीम के खिलाफ ईस्ट बंगाल की जीत की नींव रख दी।
लालरिंडिका ने पहले हाफ में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उनका पहला गोल ईस्ट बंगाल के दूसरे गोल के रूप में आया, इसके बाद उन्होंने एक और गोल किया और फिर हाफ-टाइम से पहले तीसरा गोल करके अपनी हैट्रिक पूरी की।
उनका प्रदर्शन इतना प्रभावशाली रहा कि उन्हें टूर्नामेंट का गोल्डन बॉल पुरस्कार भी मिला। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, गोल्डन बॉल के अलावा विशाल कैथ को गोल्डन ग्लव और अलाएद्दीन अजाराई को गोल्डन बूट मिला।
यह फाइनल लालरिंडिका के करियर के सबसे यादगार मुकाबलों में से एक बन गया। खास बात यह है कि उन्होंने यह प्रदर्शन कोलकाता फुटबॉल के सबसे बड़े मुकाबलों में से एक—ईस्ट बंगाल बनाम मोहन बागान—में किया।
फाइनल का गोल स्कोरकार्ड
ईस्ट बंगाल की ओर से:
- बिपिन सिंह — 10वां मिनट
- एडमंड लालरिंडिका — 12वां मिनट के आसपास
- एडमंड लालरिंडिका — 22/23वां मिनट
- एडमंड लालरिंडिका — 44वां मिनट
मोहन बागान की ओर से:
- मनवीर सिंह — 33वां मिनट
इस तरह फाइनल का अंतिम स्कोर ईस्ट बंगाल 4-1 मोहन बागान रहा।
दूसरे हाफ में ईस्ट बंगाल ने कैसे बचाई बढ़त?
पहले हाफ में 4-1 की बढ़त हासिल करने के बाद ईस्ट बंगाल के सामने चुनौती थी कि वह दूसरे हाफ में मोहन बागान की संभावित वापसी को रोके।
मोहन बागान ने दूसरे हाफ में आक्रामक रुख अपनाने की कोशिश की। टीम ने बदलाव भी किए और गोल अंतर कम करने का प्रयास किया। लेकिन ईस्ट बंगाल की रक्षापंक्ति ने काफी अनुशासित प्रदर्शन किया।
गोलकीपर प्रब्सुखन सिंह गिल ने भी महत्वपूर्ण बचाव किए। मोहन बागान के पास कुछ मौके आए, लेकिन ईस्ट बंगाल के डिफेंस और गोलकीपर ने उन्हें गोल में बदलने नहीं दिया।
दूसरे हाफ में ईस्ट बंगाल ने अपनी शुरुआती बढ़त को बनाए रखा और मैच के अंत तक स्कोर 4-1 रहा। इस तरह टीम ने 22 साल बाद डूरंड कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
फाइनल तक कैसे पहुंचा ईस्ट बंगाल?
ईस्ट बंगाल के लिए फाइनल तक का सफर भी आसान नहीं था। सेमीफाइनल में टीम का सामना SC दिल्ली से हुआ था।
19 अगस्त 2026 को खेले गए सेमीफाइनल में निर्धारित समय में दोनों टीमों में से कोई भी गोल नहीं कर सका और मुकाबला 0-0 पर समाप्त हुआ। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट में ईस्ट बंगाल ने 5-3 से जीत हासिल कर फाइनल में जगह बनाई।
इस मुकाबले में ईस्ट बंगाल के गोलकीपर प्रब्सुखन सिंह गिल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पेनल्टी शूटआउट में भी बचाव किया और टीम को फाइनल तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।
दूसरी ओर, मोहन बागान ने दूसरे सेमीफाइनल में नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी को पेनल्टी शूटआउट में हराकर फाइनल में प्रवेश किया। निर्धारित समय में मुकाबला 0-0 रहा था और मोहन बागान ने पेनल्टी में 4-3 से जीत हासिल की।
इस तरह 23 अगस्त को फाइनल में एक बार फिर कोलकाता की दो बड़ी फुटबॉल शक्तियां आमने-सामने थीं।
फाइनल से पहले ही बन गया था कोलकाता डर्बी का माहौल
ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के बीच मुकाबला केवल एक फुटबॉल मैच नहीं माना जाता। दोनों क्लबों की प्रतिद्वंद्विता भारतीय फुटबॉल की सबसे प्रसिद्ध प्रतिद्वंद्विताओं में से एक है।
डूरंड कप 2026 के फाइनल में इन दोनों टीमों के आमने-सामने आने से मुकाबले को लेकर उत्साह और बढ़ गया। आधिकारिक डूरंड कप वेबसाइट के अनुसार टूर्नामेंट की शुरुआत भी ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के बीच मुकाबले से हुई थी।
लेकिन फाइनल में कहानी पूरी तरह अलग रही। शुरुआती चरण में ही ईस्ट बंगाल ने दो गोल करके मैच पर पकड़ बना ली और बाद में लालरिंडिका की हैट्रिक ने मुकाबले को एकतरफा कर दिया।
डूरंड कप 2026 में कितनी टीमें शामिल थीं?
135वें इंडियनऑयल डूरंड कप में कुल 24 टीमों ने हिस्सा लिया। इन्हें छह ग्रुप में बांटा गया था। आधिकारिक डूरंड कप वेबसाइट पर ग्रुप A से लेकर ग्रुप F तक टीमों की सूची उपलब्ध है।
इस प्रतियोगिता में ईस्ट बंगाल, मोहन बागान, नॉर्थईस्ट यूनाइटेड, जमशेदपुर एफसी, इंडियन आर्मी, इंडियन एयर फोर्स, इंडियन नेवी, शिलॉन्ग लाजोंग, मोहम्मडन स्पोर्टिंग, SC दिल्ली सहित कई प्रमुख क्लब और टीमें शामिल थीं।
कुल मिलाकर टूर्नामेंट में 43 मुकाबले खेले गए। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 2026 संस्करण का आयोजन जुलाई से अगस्त तक किया गया और फाइनल 23 अगस्त को खेला गया।
डूरंड कप का इतिहास
डूरंड कप भारतीय फुटबॉल की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक प्रतियोगिताओं में से एक है। इसकी शुरुआत 1888 में शिमला के एनाडेल में हुई थी। आधिकारिक डूरंड कप वेबसाइट इसे एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट बताती है।
इस प्रतियोगिता की शुरुआत ब्रिटिश भारत में हुई थी। प्रारंभ में इसका संबंध ब्रिटिश भारतीय सेना के जवानों से था। समय के साथ प्रतियोगिता का स्वरूप बदला और इसमें देश के अलग-अलग क्लबों तथा पेशेवर फुटबॉल टीमों की भागीदारी बढ़ती गई।
आज डूरंड कप भारतीय फुटबॉल कैलेंडर की एक महत्वपूर्ण प्रतियोगिता है। इसका ऐतिहासिक महत्व इसे अन्य घरेलू प्रतियोगिताओं से अलग पहचान देता है।
2026 में आयोजित संस्करण इसका 135वां संस्करण था। इतने लंबे इतिहास के कारण डूरंड कप को भारतीय फुटबॉल की परंपरा और विरासत से जोड़कर देखा जाता है।
ईस्ट बंगाल के लिए 17वां खिताब क्यों खास है?
ईस्ट बंगाल ने पहली बार 1951 में डूरंड कप जीता था। इसके बाद क्लब ने कई अलग-अलग दौर में इस प्रतियोगिता में सफलता हासिल की।
लेकिन हाल के वर्षों में क्लब को इस ट्रॉफी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। 2004 में खिताब जीतने के बाद 2026 तक ईस्ट बंगाल डूरंड कप नहीं जीत सका था।
इसलिए 2026 की जीत सिर्फ एक और ट्रॉफी नहीं थी। यह क्लब के लिए 22 वर्षों के इंतजार का अंत थी।
और सबसे खास बात यह रही कि इस ऐतिहासिक जीत में सामने मोहन बागान था। यानी ईस्ट बंगाल ने अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी को हराकर वह ट्रॉफी जीती, जिसका इंतजार उसके समर्थक लंबे समय से कर रहे थे।
ईस्ट बंगाल और मोहन बागान अब बराबरी पर
2026 के फाइनल के बाद डूरंड कप के खिताबों के मामले में ईस्ट बंगाल और मोहन बागान दोनों के पास 17-17 ट्रॉफियां हो गई हैं।
इस रिकॉर्ड ने दोनों क्लबों की ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता को और दिलचस्प बना दिया है। अब भविष्य में जब भी डूरंड कप खेला जाएगा, इन दोनों टीमों के खिताबों की संख्या पर भी नजर रहेगी।
ईस्ट बंगाल की 17वीं जीत ने उसे प्रतियोगिता की सबसे सफल टीमों में शामिल कर दिया है।
2026 के व्यक्तिगत पुरस्कार
डूरंड कप 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को व्यक्तिगत पुरस्कार भी दिए गए।
गोल्डन बॉल
एडमंड लालरिंडिका — ईस्ट बंगाल FC
फाइनल में हैट्रिक लगाने के बाद लालरिंडिका का गोल्डन बॉल जीतना उनके शानदार टूर्नामेंट प्रदर्शन को दर्शाता है। फाइनल में उनके तीन गोल ईस्ट बंगाल की जीत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहे।
गोल्डन ग्लव
विशाल कैथ — मोहन बागान सुपर जायंट
मोहन बागान भले ही फाइनल हार गया, लेकिन उसके गोलकीपर विशाल कैथ के प्रदर्शन को पूरे टूर्नामेंट में मान्यता मिली और उन्हें गोल्डन ग्लव प्रदान किया गया।
गोल्डन बूट
अलाएद्दीन अजाराई — नॉर्थईस्ट यूनाइटेड FC
टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों में शीर्ष प्रदर्शन के लिए अलाएद्दीन अजाराई को गोल्डन बूट मिला।
ईस्ट बंगाल की जीत से भारतीय फुटबॉल को क्या संदेश मिला?
ईस्ट बंगाल की यह जीत कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहला संदेश यह है कि भारतीय फुटबॉल में ऐतिहासिक क्लबों की प्रतिस्पर्धा अभी भी उतनी ही मजबूत है।
दूसरा, डूरंड कप जैसे ऐतिहासिक टूर्नामेंट में युवा और उभरते खिलाड़ियों को बड़ा मंच मिलता है। एडमंड लालरिंडिका का फाइनल में प्रदर्शन इसका शानदार उदाहरण है।
तीसरा, ईस्ट बंगाल ने यह दिखाया कि बड़े मुकाबले में शुरुआती बढ़त कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। 10वें मिनट में पहला गोल और उसके बाद कुछ ही मिनटों में दूसरा गोल करके टीम ने मोहन बागान को लगातार दबाव में रखा।
चौथा, सेमीफाइनल में पेनल्टी शूटआउट और फाइनल में 4-1 की जीत बताती है कि टीम ने दबाव के अलग-अलग परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन किया।
फाइनल से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
डूरंड कप 2026 के फाइनल से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं:
- विजेता: ईस्ट बंगाल FC
- उपविजेता: मोहन बागान सुपर जायंट
- फाइनल स्कोर: ईस्ट बंगाल 4-1 मोहन बागान
- स्थान: विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन, कोलकाता
- तारीख: 23 अगस्त 2026
- संस्करण: 135वां इंडियनऑयल डूरंड कप
- ईस्ट बंगाल के खिताब: 17
- मोहन बागान के खिताब: 17
- ईस्ट बंगाल के गोल: बिपिन सिंह 1, एडमंड लालरिंडिका 3
- मोहन बागान का गोल: मनवीर सिंह 1
- फाइनल के स्टार: एडमंड लालरिंडिका
- गोल्डन बॉल: एडमंड लालरिंडिका
- गोल्डन ग्लव: विशाल कैथ
- गोल्डन बूट: अलाएद्दीन अजाराई
- ईस्ट बंगाल की पिछली डूरंड कप जीत: 2004
- 2026 में इंतजार खत्म: 22 साल बाद
इनमें से फाइनल स्कोर, 17वां खिताब और लालरिंडिका की हैट्रिक की पुष्टि स्वतंत्र समाचार रिपोर्टों तथा डूरंड कप से संबंधित स्रोतों से होती है।
निष्कर्ष
ईस्ट बंगाल की 2026 डूरंड कप जीत भारतीय फुटबॉल के इतिहास में लंबे समय तक याद की जाएगी। 22 साल के इंतजार के बाद क्लब ने 17वीं बार यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी जीती और अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी मोहन बागान को फाइनल में 4-1 से हराया।
इस मुकाबले की सबसे बड़ी कहानी एडमंड लालरिंडिका की हैट्रिक रही। बिपिन सिंह के शुरुआती गोल के बाद लालरिंडिका ने जिस तरह लगातार तीन गोल करके ईस्ट बंगाल को मजबूत स्थिति में पहुंचाया, उसने फाइनल का पूरा रुख बदल दिया।
मोहन बागान ने 33वें मिनट में मनवीर सिंह के गोल से वापसी की कोशिश की, लेकिन ईस्ट बंगाल ने पहले हाफ के अंत से पहले चौथा गोल कर दिया। दूसरे हाफ में भी ईस्ट बंगाल की रक्षापंक्ति ने बढ़त को बरकरार रखा और आखिरकार टीम ने 4-1 से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
यह जीत ईस्ट बंगाल के लिए केवल 17वीं डूरंड कप ट्रॉफी नहीं है। यह 22 वर्षों के इंतजार का अंत, अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ यादगार जीत और क्लब को डूरंड कप इतिहास की सबसे सफल टीमों में फिर से स्थापित करने वाला क्षण है।
अब ईस्ट बंगाल और मोहन बागान दोनों 17-17 डूरंड कप खिताब के साथ बराबरी पर हैं। भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह रिकॉर्ड भविष्य के मुकाबलों को और भी रोमांचक बनाएगा।
एडमंड लालरिंडिका की हैट्रिक, बिपिन सिंह का शुरुआती गोल, ईस्ट बंगाल की मजबूत रक्षापंक्ति और 22 साल बाद मिली ट्रॉफी—इन सभी ने मिलकर डूरंड कप 2026 के फाइनल को भारतीय फुटबॉल के यादगार मुकाबलों में शामिल कर दिया है।
नोट: लेख में “135वां संस्करण” को आधिकारिक डूरंड कप रिकॉर्ड के अनुसार रखा गया है। डूरंड कप की शुरुआत 1888 में हुई थी और आधिकारिक वेबसाइट इसे एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट बताती है।
Post Verified & Reviewed by: Sarkari Samrat Team
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