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EVEREST रॉकेट इंजन: भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़ी उपलब्धि

Astrobase Space Technologies का ‘EVEREST’ रॉकेट इंजन: भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़ी उपलब्धि

Astrobase Space Technologies का ‘EVEREST’ रॉकेट इंजन: भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़ी उपलब्धि

🟢 एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज का भारत का पहला निजी क्षेत्र के रॉकेट इंजन ‘एवरेस्ट’

🟢 बेंगलुरु स्थित स्पेस-टेक स्टार्टअप एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने 7 अगस्त 2026 को भारत के पहले निजी तौर पर बनाए गए 800 kN फुल-फ्लो स्टेज्ड कंबशन (FFSC) लिक्विड ऑक्सीजन (LOX)-मीथेन रॉकेट इंजन ‘एवरेस्ट’ (EVEREST) का अनावरण किया।

🟢 यह भारत को रूस, अमेरिका और चीन के बाद FFSC इंजन तकनीक वाला चौथा देश बनाता है।

🟢 SpaceX का रैप्टर इंजन (जो स्टारशिप को पावर देता है) अभी अंतरिक्ष में जाने वाला एकमात्र चालू FFSC इंजन है, जो इसी LOX-मीथेन प्रोपेलेंट कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करता है।

🟢 पारंपरिक रॉकेट इंजनों में, टर्बोपंप को चलाने के बाद बिना जले हुए ईंधन या ऑक्सीडाइज़र का कुछ हिस्सा एग्जॉस्ट के तौर पर बाहर निकाल दिया जाता है। फुल-फ्लो स्टेज्ड कंबशन (FFSC) इंजन में, यह बर्बादी खत्म हो जाती है।

🟢 इंजन में दो अलग-अलग प्री-बर्नर होते हैं, एक ऑक्सीडाइज़र-रिच प्री-बर्नर और दूसरा फ्यूल-रिच प्री-बर्नर।

🟢 मेन कंबशन चैंबर में जाने से पहले, इन प्री-बर्नर में फ्यूल (मीथेन) और ऑक्सीडाइज़र (लिक्विड ऑक्सीजन) दोनों को 100% गैस में बदल दिया जाता है।

🟢 इस गैसीफिकेशन से कंबशन प्रेशर 300 बार से ज़्यादा हो जाता है, जिससे स्पेसिफिक इम्पल्स (फ्यूल की क्षमता) ज़्यादा से ज़्यादा मिलती है और ज़रूरी टरबाइन सील पर थर्मल स्ट्रेस कम होता है।

पूरी जानकारी Details में निचे देखें :- 

Astrobase Space Technologies का ‘EVEREST’ रॉकेट इंजन: भारत के निजी स्पेस सेक्टर की बड़ी उपलब्धि

भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। अब अंतरिक्ष तकनीक और रॉकेट निर्माण के क्षेत्र में केवल सरकारी संस्थानों की भूमिका नहीं रह गई है, बल्कि देश की निजी स्पेस कंपनियां भी अत्याधुनिक तकनीकों पर काम कर रही हैं। इसी क्रम में बेंगलुरु स्थित Astrobase Space Technologies ने 7 अगस्त 2026 को अपने ‘EVEREST’ 800 kN Full-Flow Staged Combustion (FFSC) LOX-Methane रॉकेट इंजन का अनावरण किया। कंपनी के अनुसार यह भारत में निजी क्षेत्र द्वारा विकसित किया गया एक महत्वपूर्ण FFSC रॉकेट इंजन है।

यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि Full-Flow Staged Combustion तकनीक दुनिया की सबसे जटिल रॉकेट इंजन आर्किटेक्चर में से एक है। Astrobase का EVEREST इंजन Liquid Oxygen (LOX) और Liquid Methane को प्रणोदक के रूप में इस्तेमाल करता है और लगभग 800 kN (किलो न्यूटन) थ्रस्ट क्लास के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी इसे भविष्य के reusable launch systems के लिए विकसित कर रही है।


महत्वपूर्ण नोट: EVEREST का अनावरण होना और इंजन का सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में उड़ान भरना अलग-अलग बातें हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पूर्ण आकार के इंजन को आगे बड़े स्तर के परीक्षणों से गुजरना है। इसलिए इसे अभी “सफलतापूर्वक उड़ चुका इंजन” कहना सही नहीं होगा।

 

EVEREST इंजन क्या है?

EVEREST एक 800 kN श्रेणी का LOX-Methane Full-Flow Staged Combustion रॉकेट इंजन है। इसका विकास Astrobase Space Technologies द्वारा किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य भारत में ही उन्नत रॉकेट प्रणोदन प्रणाली विकसित करना और भविष्य में reusable launch vehicles के लिए इसका इस्तेमाल करना है।

कंपनी के अनुसार EVEREST को भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। Astrobase को 2026 में IN-SPACe Technology Adoption Fund (TAF) के तहत अपने indigenous 800 kN LOX-Methane FFSC engine के विकास के लिए समर्थन भी मिला है। कंपनी के अनुसार इंजन का परीक्षण आंध्र प्रदेश के अनंतपुर स्थित उसके propulsion test infrastructure में किया जा रहा है।

Astrobase के बेंगलुरु में लगभग 46,000 वर्ग फुट का assembly और integration facility भी है, जबकि कंपनी ने अनंतपुर में propulsion testing के लिए अलग infrastructure विकसित किया है।


Full-Flow Staged Combustion यानी FFSC तकनीक क्या है?

रॉकेट इंजन में ईंधन और ऑक्सीडाइज़र को बहुत अधिक दबाव पर combustion chamber तक पहुंचाने के लिए turbopumps का इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य रॉकेट इंजन architecture में turbopump को चलाने के लिए थोड़ी मात्रा में propellant को पहले जलाया जाता है और उसका कुछ हिस्सा exhaust के रूप में बाहर निकल सकता है।

लेकिन Full-Flow Staged Combustion (FFSC) architecture का उद्देश्य इस प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाना है।

FFSC इंजन में fuel और oxidizer दोनों अलग-अलग pre-burner से होकर गुजरते हैं। एक pre-burner fuel-rich और दूसरा oxidizer-rich वातावरण में काम करता है। इससे propellant turbomachinery के माध्यम से combustion process में अधिक व्यापक रूप से शामिल होता है।

इस architecture का एक प्रमुख लाभ यह है कि यह बहुत अधिक chamber pressure और उच्च efficiency हासिल करने की क्षमता प्रदान करता है। हालांकि इसके साथ engineering complexity भी काफी बढ़ जाती है।


EVEREST में LOX और Methane का इस्तेमाल

EVEREST इंजन में दो प्रमुख propellants इस्तेमाल किए जाते हैं:

  1. LOX – Liquid Oxygen
  2. Methane – Liquid Methane

Methane आधारित rocket engines को reusable launch systems के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। Methane का combustion performance अच्छा है और इसे future reusable launch architectures में इस्तेमाल करने की दिशा में दुनिया की कई कंपनियां काम कर रही हैं।

SpaceX का Raptor भी LOX-Methane और Full-Flow Staged Combustion architecture का इस्तेमाल करता है। Raptor इस तकनीक का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है और इसे Starship launch system में इस्तेमाल किया गया है।

इसलिए Astrobase का EVEREST भारत के निजी space industry के लिए एक महत्वपूर्ण technological milestone माना जा रहा है।


FFSC इंजन में दो Pre-Burner क्यों होते हैं?

FFSC architecture की सबसे खास विशेषताओं में से एक इसके दो अलग-अलग pre-burner हैं।

पहला होता है:

Oxidizer-Rich Pre-Burner

दूसरा होता है:

Fuel-Rich Pre-Burner

इन दोनों की मदद से fuel और oxidizer को अलग-अलग नियंत्रित परिस्थितियों में turbine-driving gases में बदला जाता है। इसके बाद ये gases turbopumps को चलाने में मदद करती हैं और अंततः मुख्य combustion chamber में पहुंचती हैं।

यह प्रक्रिया conventional gas-generator cycle की तुलना में अधिक जटिल है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप high chamber pressure और बेहतर propellant utilization हासिल करने की संभावना रहती है।

यही कारण है कि FFSC को rocket propulsion की सबसे कठिन architectures में गिना जाता है।


300 बार से अधिक Combustion Pressure का महत्व

आपके दिए गए विवरण में EVEREST के combustion pressure को 300 bar से अधिक बताया गया है। इतना अधिक chamber pressure rocket engine की engineering के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।

High chamber pressure का उद्देश्य सामान्य रूप से engine से अधिक performance प्राप्त करना होता है। लेकिन pressure बढ़ने के साथ:

  • तापमान नियंत्रण कठिन होता है।
  • turbopump पर ज्यादा mechanical load आता है।
  • combustion stability महत्वपूर्ण हो जाती है।
  • materials पर अधिक stress पड़ता है।
  • seals और rotating components की reliability चुनौती बन जाती है।

इसलिए केवल अधिक pressure हासिल करना पर्याप्त नहीं होता। इंजन को लंबे समय तक सुरक्षित और स्थिर तरीके से operate करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


EVEREST और भारत का निजी Space Sector

भारत में private space sector पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। Astrobase भी इसी ecosystem का हिस्सा है।

कंपनी की स्थापना 2024 में हुई थी। इसके co-founders में Neeraj Khandelwal और Devakumar Thammisetty शामिल हैं। कंपनी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार Devakumar Thammisetty पहले ISRO में rocket propulsion से जुड़े रहे हैं।

Astrobase पहले से ही अपने propulsion technology development पर काम कर रही थी। कंपनी के अनुसार उसने high-speed turbopump testing और igniter hot-fire testing जैसे शुरुआती milestones पूरे किए हैं।

मार्च 2026 में Astrobase के पास भारत की बड़ी industrial 3D-printing capabilities में से एक पहुंचने की जानकारी भी सामने आई थी, जिसका उद्देश्य complex rocket-engine components के निर्माण में मदद करना था।


क्या EVEREST भारत का पहला FFSC इंजन है?

Astrobase और हालिया रिपोर्टों में EVEREST को भारत का पहला privately developed 800 kN FFSC rocket engine बताया गया है। कंपनी ने यह भी कहा है कि इस उपलब्धि के साथ भारत FFSC technology रखने वाले देशों की एक छोटी सूची में शामिल हो गया है।

हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। “इंजन का विकास/अनावरण” और “इंजन का सफल flight-proven होना” एक समान नहीं हैं।

रॉकेट इंजन को अंतरिक्ष में इस्तेमाल करने से पहले ground testing, hot-fire testing, repeated testing, qualification और अंततः launch vehicle integration जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

इसलिए EVEREST का वर्तमान milestone मुख्य रूप से advanced engine development और hardware unveiling से जुड़ा है।


SpaceX Raptor से तुलना क्यों हो रही है?

EVEREST की चर्चा में SpaceX का Raptor engine बार-बार सामने आ रहा है क्योंकि दोनों में एक महत्वपूर्ण समानता है—LOX-Methane Full-Flow Staged Combustion architecture

SpaceX का Raptor Starship launch system के लिए विकसित किया गया है और FFSC architecture का वास्तविक flight-proven उदाहरण है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि EVEREST और Raptor समान इंजन हैं। दोनों की thrust class, engineering design, vehicle architecture और development objectives अलग हो सकते हैं।

EVEREST का महत्व इस बात में है कि भारत की private space industry अब ऐसे अत्यंत जटिल propulsion architecture पर काम कर रही है।


Reusable Rockets के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

भविष्य के space launch systems में reusability बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

यदि rocket के महत्वपूर्ण हिस्सों को बार-बार इस्तेमाल किया जा सके तो प्रत्येक launch की लागत को कम करने और launch frequency बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

FFSC architecture high efficiency और high-performance reusable systems के लिए आकर्षक माना जाता है। Astrobase भी EVEREST को reusable medium-lift launch vehicle के संदर्भ में विकसित कर रही है।

हालांकि किसी इंजन को reusable बनाने के लिए केवल high efficiency पर्याप्त नहीं है। उसे कई बार restart, thermal cycling, vibration और अन्य demanding conditions को सहने की क्षमता भी साबित करनी होती है।


भारत के लिए इसका क्या महत्व है?

भारत के लिए indigenous rocket propulsion technology का विकास रणनीतिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है।

अगर देश में advanced rocket engines का design, manufacturing और testing ecosystem मजबूत होता है, तो भविष्य में:

  • विदेशी propulsion technology पर निर्भरता कम हो सकती है।
  • भारतीय launch companies को घरेलू engine technology मिल सकती है।
  • satellite launch services का ecosystem मजबूत हो सकता है।
  • reusable launch vehicles के development को गति मिल सकती है।
  • high-tech manufacturing में नई नौकरियां और कंपनियां विकसित हो सकती हैं।
  • भारत global commercial space market में अपनी भूमिका बढ़ा सकता है।

IN-SPACe द्वारा Astrobase के 800 kN LOX-Methane engine development को Technology Adoption Fund के तहत समर्थन मिलना भी इस क्षेत्र के बढ़ते institutional support को दिखाता है।


EVEREST के आगे की चुनौती क्या है?

EVEREST का अनावरण एक महत्वपूर्ण milestone जरूर है, लेकिन असली परीक्षा इसके आगे शुरू होती है।

पूर्ण आकार के इंजन को विभिन्न चरणों में परीक्षण से गुजरना होगा। इसमें controlled hot-fire testing, performance validation, reliability testing और qualification शामिल हो सकते हैं।

रॉकेट इंजन में छोटी सी engineering समस्या भी बहुत बड़े failure का कारण बन सकती है। इसलिए एक सफल prototype तैयार करना और उसे लगातार सुरक्षित एवं विश्वसनीय रूप से चलाना दो अलग-अलग उपलब्धियां हैं।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार EVEREST को आगे full-scale testing की दिशा में ले जाया जाना है।


भारत की Space Race में नया अध्याय

भारत ने पिछले दशकों में ISRO के माध्यम से space technology में मजबूत स्थान बनाया है। अब private companies इस ecosystem को commercial और industrial scale पर आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

Astrobase का EVEREST इसी बदलाव का एक उदाहरण है।

यह केवल एक rocket engine की कहानी नहीं है। इसके पीछे advanced metallurgy, turbomachinery, combustion engineering, cryogenic technology, software, control systems, 3D manufacturing और testing infrastructure जैसे कई क्षेत्रों का योगदान होता है।

अगर EVEREST आने वाले परीक्षणों में अपेक्षित प्रदर्शन हासिल करता है, तो यह भारत के private launch vehicle ecosystem के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


निष्कर्ष

Astrobase Space Technologies द्वारा EVEREST 800 kN LOX-Methane FFSC rocket engine का अनावरण भारत के निजी space sector के लिए निश्चित रूप से एक उल्लेखनीय milestone है। Full-Flow Staged Combustion जैसी जटिल propulsion technology पर काम करना engineering के लिहाज से बड़ी चुनौती है।

इस इंजन की खासियत इसका LOX-Methane propellant combination, FFSC architecture और लगभग 800 kN thrust class है। कंपनी का लक्ष्य भविष्य में reusable launch systems के लिए इस technology का इस्तेमाल करना है।

हालांकि अभी इसे अंतिम रूप से flight-proven engine कहना जल्दबाजी होगी। आगे होने वाले hot-fire और qualification tests यह तय करेंगे कि EVEREST वास्तविक launch vehicle में कितनी सफलतापूर्वक काम कर पाता है।

फिर भी, भारत में एक private company द्वारा इस स्तर की rocket propulsion technology का विकास यह दिखाता है कि देश का private space ecosystem तेजी से advanced technology की ओर बढ़ रहा है।

EVEREST की असली सफलता उसके अनावरण में नहीं, बल्कि आने वाले परीक्षणों में उसके प्रदर्शन और reliability में तय होगी। यही आने वाले समय में भारत की reusable और commercially viable launch technology के लिए सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा होगी।


स्रोत/संदर्भ

Astrobase Space Technologies की आधिकारिक जानकारी और उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के आधार पर यह लेख तैयार किया गया है। Astrobase की आधिकारिक updates में 800 kN LOX-Methane engine development और IN-SPACe Technology Adoption Fund support की जानकारी उपलब्ध है।


नोट: ऊपर “भारत का पहला निजी FFSC इंजन” जैसे दावे को कंपनी/मीडिया रिपोर्टों के संदर्भ में लिखा गया है; इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित राष्ट्रीय रिकॉर्ड के रूप में नहीं प्रस्तुत किया गया है।

अगर इसमें कोई भी जानकारी गलत लगे तो तुरंत संपर्क करें उससे सुधारने का प्रयाय करेंगे।


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