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पीएम मोदी ने जारी की राम नाथ कोविंद की आत्मकथा, जानिए पूरी कहानी

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की आत्मकथा “ट्रायम्फ ऑफ़ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ़, माई स्ट्रगल्स” का विमोचन, जानिए किताब में क्या है खास

Ram Nath kovind Autobiography: पीएम मोदी ने जारी की राम नाथ कोविंद की आत्मकथा, जानिए पूरी कहानी

🟢 पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद की आत्मकथा “ट्रायम्फ ऑफ़ द इंडियन रिपब्लिक”

🟢 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद की आत्मकथा, जिसका शीर्षक “ट्रायम्फ ऑफ़ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ़, माई स्ट्रगल्स” है, जारी करेंगे।

🟢 एक वकील, अनुभवी राजनीतिक प्रतिनिधि और भारतीय सार्वजनिक जीवन व समाज में समानता और ईमानदारी के लंबे समय से समर्थक रहे श्री राम नाथ कोविन्द का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश में कानपुर के पास परौंख गाँव में हुआ था।

🟢 25 जुलाई 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति का पद संभालने से पहले, श्री कोविन्द ने 16 अगस्त 2015 से 20 जून 2017 तक बिहार राज्य के 36वें राज्यपाल के रूप में कार्य किया।

🟢 1991 में कोविंद BJP में शामिल हुए और तीन साल बाद उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा (भारत की संसद का ऊपरी सदन) के लिए चुना गया।

🟢 इस सदन में अपने 12 साल के कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई कमेटियों में काम किया, जिनमें कानून और न्याय, सामाजिक न्याय और अधिकारिता, और अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण से जुड़ी कमेटियाँ शामिल थीं।

🟢 वे संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे और 2002 में उन्होंने महासभा को संबोधित किया।

🟢 श्री कोविन्द 1977 से 1979 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के वकील और 1980 से 1993 तक सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के स्थायी वकील (स्टैंडिंग काउंसिल) रहे। 1978 में वे भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 'एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड' बने।

🟢 उन्होंने 1993 तक 16 वर्षों तक दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में वकालत की।

विस्तृत जानकारी नीचे देखें 👇 

नई दिल्ली: भारत के पूर्व राष्ट्रपति और देश के 14वें राष्ट्रपति रहे श्री राम नाथ कोविंद की आत्मकथा “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” का प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में विमोचन किया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कोविंद के जीवन-संघर्ष, सार्वजनिक सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद किया।

यह आत्मकथा केवल एक पूर्व राष्ट्रपति के व्यक्तिगत जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की यात्रा को सामने रखती है, जिसने साधारण सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा कि यह पुस्तक भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर बन सकती है।

📚 आत्मकथा का नाम क्या है?

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का पूरा नाम है—

“Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles”

हिंदी में इसका अर्थ लगभग “भारतीय गणराज्य की विजय: मेरा जीवन, मेरे संघर्ष” है।

किताब में कोविंद के बचपन, शिक्षा, शुरुआती संघर्ष, वकालत, राजनीतिक जीवन, राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य, बिहार के राज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी और अंततः भारत के राष्ट्रपति बनने तक की यात्रा को समेटा गया है।

पुस्तक का केंद्र केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां नहीं हैं। इसमें उन अनुभवों और मूल्यों पर भी ध्यान दिया गया है, जिन्होंने कोविंद की सोच और सार्वजनिक जीवन को आकार दिया।

🏛️ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया विमोचन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अगस्त 2026 को सुबह 9:30 बजे नई दिल्ली के विज्ञान भवन में इस आत्मकथा का विमोचन किया। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोविंद जी की जीवन यात्रा सार्वजनिक सेवा और देश की प्रगति के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

विमोचन के बाद प्रधानमंत्री ने आत्मकथा को भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी को कोविंद के लेखन और अनुभवों से सीखना चाहिए। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस पुस्तक में व्यक्तिगत संघर्ष और भारतीय लोकतंत्र की सफलता—दोनों की कहानी दिखाई देती है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कोविंद की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत बन सकती हैं।

👤 कौन हैं राम नाथ कोविंद?

श्री राम नाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात क्षेत्र के परौंख गांव में हुआ था।

उनका जीवन ग्रामीण परिवेश से शुरू हुआ और आगे चलकर उन्होंने कानून, राजनीति और संवैधानिक जिम्मेदारियों के विभिन्न महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए।

वर्ष 2017 में वे भारत के 14वें राष्ट्रपति बने और 25 जुलाई 2017 को उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ ली। उनका कार्यकाल 25 जुलाई 2022 तक रहा।

उनसे पहले वे बिहार के राज्यपाल के रूप में भी काम कर चुके थे।

⚖️ वकालत से शुरू हुआ सफर

राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने से पहले राम नाथ कोविंद ने लंबे समय तक कानून के क्षेत्र में काम किया।

उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत की। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वे 1977 से 1979 तक दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे और इसके बाद 1980 से 1993 तक सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के स्थायी वकील के रूप में कार्य किया।

वर्ष 1978 में वे सुप्रीम कोर्ट के Advocate-on-Record बने।

इस तरह उनका सार्वजनिक जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानून और संवैधानिक व्यवस्था की गहरी समझ भी उनके अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।

🏛️ राज्यसभा में 12 साल की भूमिका

राम नाथ कोविंद वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। वे लगातार दो कार्यकाल तक राज्यसभा के सदस्य रहे और लगभग 12 वर्षों तक संसद के उच्च सदन में काम किया।

सांसद के रूप में उन्होंने विभिन्न संसदीय समितियों में काम किया। इनमें कानून एवं न्याय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण से संबंधित समितियां शामिल थीं।

संसदीय जीवन ने उन्हें देश की कानून-व्यवस्था, सामाजिक चुनौतियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को करीब से समझने का अवसर दिया।

यही अनुभव आगे चलकर उनके संवैधानिक पदों की जिम्मेदारियों में भी उपयोगी रहा।

🌍 संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व

राम नाथ कोविंद के सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू अंतरराष्ट्रीय मंच से भी जुड़ा रहा है।

वे संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे और वर्ष 2002 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया।

यह अनुभव उनके सार्वजनिक जीवन के उस पक्ष को दिखाता है, जिसमें घरेलू राजनीति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी शामिल रहा।

🟠 बिहार के राज्यपाल भी रहे

राष्ट्रपति बनने से पहले राम नाथ कोविंद ने बिहार के राज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

उन्होंने 16 अगस्त 2015 से 20 जून 2017 तक बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्य किया।

बिहार के राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल लगभग दो वर्षों का रहा। इस दौरान वे राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में विभिन्न प्रशासनिक और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का हिस्सा रहे।

बिहार के राज्यपाल पद से उनका इस्तीफा जून 2017 में हुआ, जिसके बाद वे राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवार बने।

🇮🇳 2017 में बने भारत के 14वें राष्ट्रपति

वर्ष 2017 भारतीय राजनीति और राम नाथ कोविंद के जीवन दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा।

राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद उन्होंने 25 जुलाई 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।

राष्ट्रपति पद भारत का सर्वोच्च संवैधानिक पद है। इस पद पर रहते हुए कोविंद ने देश-विदेश में अनेक कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और संविधान के अनुरूप राष्ट्रपति की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।

उनका राष्ट्रपति कार्यकाल 25 जुलाई 2017 से 25 जुलाई 2022 तक रहा। उनके बाद श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति पद संभाला।

📖 आत्मकथा में क्या-क्या देखने को मिलेगा?

इस किताब की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे केवल राजनीतिक घटनाओं का संग्रह नहीं माना जा रहा है।

आत्मकथा में कोविंद अपने जीवन के अलग-अलग चरणों को व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से सामने रखते हैं।


📌 किताब में मुख्य रूप से ये पहलू शामिल हैं:

1. बचपन और पारिवारिक जीवन
परौंख गांव से शुरू हुई उनकी जीवन यात्रा और बचपन की परिस्थितियां।

2. शिक्षा और संघर्ष
सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा हासिल करने की कोशिश और आगे बढ़ने की कहानी।

3. कानून का क्षेत्र
दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत का अनुभव।

4. राजनीतिक जीवन
राजनीति में प्रवेश और सार्वजनिक सेवा की दिशा में बढ़ता कदम।

5. राज्यसभा का अनुभव
संसद में लगभग 12 वर्षों के दौरान मिला अनुभव।

6. बिहार के राज्यपाल का कार्यकाल
एक संवैधानिक पद पर काम करने के अनुभव।

7. राष्ट्रपति भवन की जिंदगी
राष्ट्रपति के रूप में पांच वर्षों के अनुभव और महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन।

8. लोकतंत्र और संविधान
भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उनके विचार।

9. संघर्ष से सफलता तक
साधारण पृष्ठभूमि से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की कहानी।

पुस्तक के प्रकाशक से जुड़े विवरण भी बताते हैं कि आत्मकथा में परौंख गांव से लेकर राज्यसभा, बिहार के राज्यपाल पद और राष्ट्रपति भवन तक की यात्रा को शामिल किया गया है।

🔥 बचपन की कठिन घटना का भी जिक्र

विमोचन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मकथा में वर्णित कोविंद के बचपन की एक दर्दनाक घटना का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री के अनुसार, कम उम्र में कोविंद की मां की एक घर में आग लगने की दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इस कठिन घटना के बाद परिवार को संभालने में आसपास के लोगों की भूमिका भी रही।

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस अनुभव ने कोविंद के भीतर समाज, एकता और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत किया। उनके पिता ने भी परिवार को संभालते हुए बच्चों में मजबूत संस्कार विकसित किए।

यह प्रसंग इस आत्मकथा को केवल राजनीतिक संस्मरण से अलग करता है। यहां एक ऐसे बच्चे की कहानी सामने आती है जिसने जीवन की कठिन परिस्थितियों को अपने रास्ते की दीवार बनने नहीं दिया।

💡 शिक्षा और मेहनत को बनाया ताकत

राम नाथ कोविंद की जीवन यात्रा में शिक्षा और मेहनत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।

प्रधानमंत्री मोदी ने विमोचन कार्यक्रम में कहा कि कोविंद ने संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और मेहनत के दम पर ऐसी ऊंचाई हासिल की जिसकी उस समय कल्पना करना भी कठिन था।

यही वजह है कि उनकी आत्मकथा छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक हो सकती है।

इसमें सफलता को केवल पद या प्रतिष्ठा के रूप में देखने के बजाय संघर्ष, धैर्य, शिक्षा और सार्वजनिक सेवा के नजरिए से समझने का अवसर मिलता है।

🌱 परौंख गांव से राष्ट्रपति भवन तक

राम नाथ कोविंद की कहानी का सबसे प्रेरक हिस्सा उनकी पूरी यात्रा है।

एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर—

परौंख गांव → शिक्षा → वकालत → सार्वजनिक जीवन → राज्यसभा → बिहार के राज्यपाल → भारत के राष्ट्रपति

तक पहुंचना भारतीय लोकतंत्र की उस संभावना को दिखाता है जिसमें सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने संबोधन में इसी पहलू पर जोर दिया और कहा कि गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले जैसे महापुरुषों ने ऐसे भारत का सपना देखा था, जहां गरीब और वंचित वर्ग के लोगों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिले।

🗳️ राष्ट्रपति पद के बाद भी सार्वजनिक जीवन से जुड़े

राष्ट्रपति पद से कार्यकाल पूरा होने के बाद राम नाथ कोविंद सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह अलग नहीं हुए।

वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने ‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़े विषय पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता राम नाथ कोविंद ने की। समिति ने मार्च 2024 में अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

विमोचन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा कि राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी कोविंद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर काम कर रहे हैं।

🎯 युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह किताब?

आज के युवाओं के सामने प्रतियोगिता, करियर, रोजगार और लगातार बदलती परिस्थितियों की बड़ी चुनौतियां हैं।

ऐसे समय में किसी ऐसे व्यक्ति की जीवन यात्रा पढ़ना, जिसने सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा हासिल की और धीरे-धीरे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच बनाई, काफी प्रेरणादायक हो सकता है।

इस आत्मकथा से युवाओं को कई बातें सीखने को मिल सकती हैं—

✅ कठिन परिस्थिति से घबराना नहीं

✅ शिक्षा को प्राथमिकता देना

✅ लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करना

✅ अवसर मिलने पर जिम्मेदारी निभाना

✅ सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और अनुशासन बनाए रखना

✅ सफलता के बाद भी विनम्र रहना

प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा कि नई पीढ़ी को कोविंद के लेखन और अनुभवों से काफी कुछ सीखने को मिलेगा।

📌 आत्मकथा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी

जानकारी विवरण
📖 पुस्तक का नाम Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles
✍️ लेखक राम नाथ कोविंद
👤 लेखक का परिचय भारत के पूर्व राष्ट्रपति
🇮🇳 राष्ट्रपति पद भारत के 14वें राष्ट्रपति
📅 राष्ट्रपति कार्यकाल 25 जुलाई 2017 – 25 जुलाई 2022
🏛️ बिहार के राज्यपाल 16 अगस्त 2015 – 20 जून 2017
📍 जन्म 1 अक्टूबर 1945, परौंख, उत्तर प्रदेश
🏛️ विमोचन 12 अगस्त 2026
📍 स्थान विज्ञान भवन, नई दिल्ली
👤 विमोचक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अगस्त 2026 को विज्ञान भवन में इस आत्मकथा का विमोचन किया।


🏆 क्यों खास है “Triumph of the Indian Republic”?

इस किताब के शीर्षक में ही इसकी पूरी भावना छिपी हुई है।

“My Life, My Struggles” यानी मेरे जीवन और मेरे संघर्ष व्यक्तिगत हैं, लेकिन “Triumph of the Indian Republic” यानी उन संघर्षों से मिली सफलता केवल व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक भारत की सफलता भी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने विमोचन कार्यक्रम में इसी अर्थ को रेखांकित करते हुए कहा कि संघर्ष व्यक्तिगत हैं, लेकिन उन संघर्षों से मिली विजय भारतीय गणराज्य और उसके लोकतंत्र की विजय है।

यही इस आत्मकथा को खास बनाता है।

यह केवल “एक व्यक्ति राष्ट्रपति कैसे बना” की कहानी नहीं है, बल्कि यह भी बताती है कि भारत का लोकतंत्र किस तरह अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों को आगे बढ़ने का अवसर देता है।

📝 निष्कर्ष

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की आत्मकथा “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” भारतीय सार्वजनिक जीवन की एक महत्वपूर्ण पुस्तक के रूप में सामने आई है।

परौंख गांव से शुरू हुई यात्रा, कानून की पढ़ाई और वकालत, राज्यसभा की राजनीति, बिहार के राज्यपाल की जिम्मेदारी और फिर भारत के 14वें राष्ट्रपति के पद तक पहुंचना—यह पूरा सफर अपने आप में असाधारण है।

12 अगस्त 2026 को विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पुस्तक का विमोचन इस यात्रा को एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक अवसर में बदल देता है।

इस आत्मकथा की खासियत यह है कि इसमें केवल पद और उपलब्धियां नहीं, बल्कि संघर्ष, परिवार, शिक्षा, समाज, लोकतंत्र, संविधान और सार्वजनिक सेवा जैसे विषयों को भी समझने का अवसर मिलता है।

युवाओं, छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए यह पुस्तक विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, क्योंकि इसमें एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने कठिन परिस्थितियों को अपने विकास की राह में बाधा नहीं बनने दिया।

एक गांव से राष्ट्रपति भवन तक की यह यात्रा यही संदेश देती है—परिस्थितियां चाहे जैसी हों, शिक्षा, मेहनत, धैर्य और सही मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की कोशिश जारी रखनी चाहिए

❓ Frequently Asked Questions (FAQ)

1. राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का नाम क्या है?

राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का नाम “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” है। इसका हिंदी अर्थ लगभग “भारतीय गणराज्य की विजय: मेरा जीवन, मेरे संघर्ष” है।

2. राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन कब हुआ?

आत्मकथा का विमोचन 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में किया गया।

3. राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किसने किया?

इस आत्मकथा का विमोचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।

4. राम नाथ कोविंद भारत के कौन-से राष्ट्रपति थे?

राम नाथ कोविंद भारत के 14वें राष्ट्रपति थे। उन्होंने 25 जुलाई 2017 से 25 जुलाई 2022 तक राष्ट्रपति पद संभाला।

5. राम नाथ कोविंद का जन्म कब और कहां हुआ था?

राम नाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के परौंख गांव में हुआ था।

6. राम नाथ कोविंद राष्ट्रपति बनने से पहले क्या करते थे?

राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने वकालत, राजनीति और संवैधानिक पदों पर काम किया। वे राज्यसभा सांसद और बिहार के राज्यपाल भी रहे।

7. राम नाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल कब रहे?

उन्होंने 16 अगस्त 2015 से 20 जून 2017 तक बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्य किया।

8. राम नाथ कोविंद कितने समय तक राज्यसभा सांसद रहे?

वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए और लगभग 12 वर्षों तक राज्यसभा के सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने कई संसदीय समितियों में काम किया।

9. राम नाथ कोविंद ने वकालत कहां की थी?

उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट और भारत के सुप्रीम कोर्ट में वकालत की। वे केंद्र सरकार के वकील और बाद में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के स्थायी वकील भी रहे।

10. क्या राम नाथ कोविंद संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं?

हाँ। वे संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे और 2002 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था।

11. राम नाथ कोविंद की आत्मकथा में क्या-क्या बताया गया है?

किताब में उनके बचपन, पारिवारिक जीवन, शिक्षा, संघर्ष, वकालत, राजनीतिक सफर, राज्यसभा के अनुभव, बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्य और राष्ट्रपति पद के अनुभव से जुड़े पहलुओं को शामिल किया गया है।

12. राम नाथ कोविंद की आत्मकथा युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उनकी यात्रा साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की है। इसलिए यह किताब मेहनत, शिक्षा, संघर्ष, अनुशासन और सार्वजनिक सेवा से जुड़े प्रेरक पहलुओं को समझने में मदद कर सकती है।

13. राम नाथ कोविंद की मां से जुड़ी कौन-सी घटना आत्मकथा में बताई गई है?

विमोचन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके बचपन की एक दर्दनाक घटना का उल्लेख किया। उनके अनुसार, कम उम्र में घर में आग लगने की दुर्घटना में राम नाथ कोविंद की मां का निधन हो गया था।

14. राम नाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने से पहले वे कौन-सा संवैधानिक पद संभाल चुके थे?

राष्ट्रपति बनने से पहले वे बिहार के राज्यपाल रह चुके थे। वे 16 अगस्त 2015 को राज्यपाल बने और जून 2017 तक इस पद पर रहे।

15. राम नाथ कोविंद का राष्ट्रपति कार्यकाल कब समाप्त हुआ?

उनका राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल 25 जुलाई 2022 को समाप्त हुआ। इसके बाद द्रौपदी मुर्मू ने भारत के राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभाली।

16. राम नाथ कोविंद ने ‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़ी समिति की अध्यक्षता की थी?

हाँ। 2023 में केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता राम नाथ कोविंद ने की थी। समिति ने मार्च 2024 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

17. “Triumph of the Indian Republic” का मुख्य विषय क्या है?

किताब का मुख्य केंद्र राम नाथ कोविंद का जीवन, संघर्ष और सार्वजनिक सेवा का सफर है। साथ ही इसमें भारतीय लोकतंत्र, संविधान और उस व्यवस्था से मिले अवसरों की झलक भी मिलती है।

18. राम नाथ कोविंद की आत्मकथा किसके लिए उपयोगी हो सकती है?

यह किताब छात्रों, युवाओं, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों और भारतीय राजनीति व लोकतंत्र में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है।

19. राम नाथ कोविंद की आत्मकथा कहां जारी की गई?

आत्मकथा का विमोचन विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में किया गया।

20. राम नाथ कोविंद की आत्मकथा की सबसे खास बात क्या है?

इसकी खास बात यह है कि इसमें एक ऐसे व्यक्ति की जीवन यात्रा सामने आती है, जो परौंख गांव से निकलकर वकील, राज्यसभा सांसद, बिहार के राज्यपाल और अंततः भारत के 14वें राष्ट्रपति बने। यह सफर भारतीय लोकतंत्र में अवसर और संघर्ष दोनों की कहानी बताता है।

📌 Description

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की आत्मकथा “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” का 12 अगस्त 2026 को पीएम नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन में विमोचन किया। जानिए किताब, कोविंद के जीवन-संघर्ष, राजनीतिक सफर और राष्ट्रपति कार्यकाल से जुड़ी पूरी जानकारी।

स्रोत: भारत सरकार का Press Information Bureau (PIB) और प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जानकारी।

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