SCO Summit 2026: बिश्केक में होगा 26वां SCO शिखर सम्मेलन

SCO Summit 2026: बिश्केक में होगा 26वां SCO शिखर सम्मेलन

संक्षिप्त जानकारी ✅

🟢 किर्गिस्तान के बिश्केक में 26वां SCO समिट

🟢 26वें SCO समिट 2026 के लिए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के नेता और प्रतिनिधि 31 अगस्त से 1 सितंबर, 2026 के बीच किर्गिस्तान के बिश्केक में इकट्ठा होंगे।

🟢 SCO समिट 2026 "SCO के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर" थीम के तहत आयोजित की जाएगी।

🟢 इस समिट का महत्व इसलिए भी है क्योंकि संगठन अपनी स्थापना के 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है।

🟢 यह दिखाता है कि SCO यूरेशिया क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा, सहयोग और कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला संगठन बन गया है।

🟢 25वां शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन

🟢 चीन के तियानजिन में एससीओ के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की 25वीं बैठक आयोजित हुई।

🟢 लाओस को भागीदार देश के रूप में स्वीकार कर लिया गया है , जिससे एससीओ की कुल संख्या 27 हो गई है (10 सदस्य (भारत सहित) + 17 भागीदार)।

🟢 पहला एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन 14-15 जून 2001 को शंघाई, चीन में आयोजित किया गया था।

🟢 23वा शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन

🟢 भारत ने इससे पहले 4 जुलाई, 2023 को "एक सुरक्षित SCO की ओर" (Towards a Secure SCO) थीम के तहत वर्चुअल तरीके से 23वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी।

🟢 शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बारे में

🟢 SCO की आधिकारिक तौर पर 15 जून 2001 को शंघाई, चीन में स्थापना हुई थी। SCO का विकास पहले के 'शंघाई फाइव' समूह (1996) से हुआ, जिसमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान शामिल थे।

🟢 इसमें 2017 में भारत और पाकिस्तान, 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस शामिल हुए।

🟢 SCO सचिवालय की आधिकारिक कामकाजी भाषाएँ रूसी और चीनी हैं।

🟢 SCO का स्थायी सचिवालय बीजिंग, चीन में स्थित है। क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) की कार्यकारी समिति का मुख्यालय ताशकंद, उज़्बेकिस्तान में है।


पूरी जानकारी Details में निचे देखें :-

SCO Summit 2026: किर्गिस्तान के बिश्केक में होगा 26वां शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन, जानें पूरी जानकारी

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से अगस्त-सितंबर 2026 में होने वाला शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation – SCO) का 26वां शिखर सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बार SCO के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में जुटेंगे।

26वां SCO शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 के बीच आयोजित होने जा रहा है। यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि इसी वर्ष शंघाई सहयोग संगठन अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। सम्मेलन की थीम भी इसी उपलब्धि को ध्यान में रखते हुए रखी गई है।

इस वर्ष की थीम है — “25 Years of the SCO: Together Towards Sustainable Peace, Development and Prosperity”, जिसका हिंदी अर्थ है — “SCO के 25 वर्ष: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर।”

SCO पिछले ढाई दशकों में केवल सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग तक सीमित नहीं रहा है। अब इसमें व्यापार, ऊर्जा, परिवहन, कनेक्टिविटी, डिजिटल तकनीक, पर्यावरण, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग जैसे कई क्षेत्र भी शामिल हो चुके हैं।


26वां SCO Summit 2026 कहां और कब होगा?

26वां SCO शिखर सम्मेलन 2026 किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होगा।

इस सम्मेलन की मुख्य तारीखें इस प्रकार हैं:

कार्यक्रम: 26वां SCO Summit 2026
स्थान: बिश्केक, किर्गिस्तान
तारीख: 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026
अवसर: SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होना
अध्यक्षता: किर्गिस्तान
मुख्य थीम: “25 Years of the SCO: Together Towards Sustainable Peace, Development and Prosperity”

SCO की विदेश मंत्रियों की बैठक में भी बिश्केक में होने वाले आगामी राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन की तैयारियों पर चर्चा की गई थी। इसमें 25वीं वर्षगांठ से संबंधित बिश्केक घोषणा के मसौदे सहित कई दस्तावेजों को आगे की तैयारी के लिए मंजूरी दी गई।

भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए किर्गिस्तान की यात्रा करने वाले हैं। उनकी यात्रा 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 के व्यापक मध्य एशिया दौरे का हिस्सा है।


SCO Summit 2026 की थीम क्या है?

इस वर्ष SCO Summit की थीम है:

“25 Years of the SCO: Together Towards Sustainable Peace, Development and Prosperity”

हिंदी में इसका अर्थ है:

“SCO के 25 वर्ष: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर”

इस थीम में संगठन की 25 वर्षों की यात्रा और भविष्य की प्राथमिकताओं को शामिल किया गया है।

SCO की शुरुआत मुख्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा, विश्वास निर्माण और सीमा से जुड़े सहयोग के संदर्भ में हुई थी। लेकिन समय के साथ इसका एजेंडा काफी व्यापक हुआ है।

आज संगठन के तहत सुरक्षा के अलावा आर्थिक सहयोग, परिवहन संपर्क, डिजिटल विकास, ऊर्जा, पर्यावरण, शिक्षा, संस्कृति और मानवीय सहयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा होती है।

किर्गिस्तान की अध्यक्षता के दौरान सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, डिजिटलाइजेशन, पर्यावरण और सांस्कृतिक-मानवीय सहयोग जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।


SCO क्या है?

SCO का पूरा नाम Shanghai Cooperation Organisation यानी शंघाई सहयोग संगठन है।

यह एक यूरेशियाई क्षेत्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास, सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।

SCO की शुरुआत Shanghai Five नामक समूह से हुई थी।

1996 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान ने मिलकर Shanghai Five की शुरुआत की थी। इसके बाद संगठन का दायरा बढ़ा और 15 जून 2001 को चीन के शंघाई शहर में SCO की औपचारिक स्थापना हुई।

इस प्रकार 2026 में SCO अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है।


Shanghai Five से SCO तक का सफर

SCO के विकास को समझने के लिए Shanghai Five को समझना जरूरी है।

1996 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान ने आपसी विश्वास और सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बढ़ाने के लिए एक समूह बनाया था।

इसे Shanghai Five कहा गया।

बाद में इस सहयोग का दायरा बढ़ा और 15 जून 2001 को उज्बेकिस्तान भी इसमें शामिल हुआ। इसके साथ ही संगठन को औपचारिक रूप से Shanghai Cooperation Organisation के रूप में स्थापित किया गया।

SCO के शुरुआती उद्देश्य में सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़ाना, क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत करना और आतंकवाद, अलगाववाद तथा उग्रवाद जैसी चुनौतियों से मिलकर निपटना प्रमुख था।


SCO की स्थापना कब हुई?

SCO की औपचारिक स्थापना:

15 जून 2001

को

शंघाई, चीन

में हुई थी।

SCO का पहला शिखर सम्मेलन भी 14-15 जून 2001 को शंघाई, चीन में आयोजित हुआ था।

यही कारण है कि 2026 का बिश्केक सम्मेलन संगठन की 25वीं वर्षगांठ के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है।


SCO में भारत कब शामिल हुआ?

भारत SCO का पूर्ण सदस्य देश 2017 में बना।

भारत के साथ पाकिस्तान को भी 2017 में SCO की पूर्ण सदस्यता मिली।

भारत के लिए SCO इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसा मंच है जहां भारत को रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों सहित कई महत्वपूर्ण देशों के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत का अवसर मिलता है।

भारत SCO के माध्यम से आतंकवाद-रोधी सहयोग, क्षेत्रीय संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और मध्य एशिया के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर देता रहा है।


SCO में नए देशों का विस्तार

SCO की सदस्यता समय के साथ लगातार बढ़ी है।

2017 में भारत और पाकिस्तान संगठन के पूर्ण सदस्य बने।

इसके बाद 2023 में ईरान को पूर्ण सदस्यता मिली।

2024 में बेलारूस SCO का पूर्ण सदस्य बना।

इस विस्तार के कारण SCO का भौगोलिक और राजनीतिक प्रभाव काफी बढ़ा।

आज संगठन का प्रभाव मध्य एशिया से लेकर दक्षिण एशिया, रूस, चीन और मध्य-पूर्व तक दिखाई देता है।


SCO परिवार में कितने देश हैं?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है।

SCO के पूर्ण सदस्य देशों की संख्या 10 है। इसके अलावा संगठन में 2 पर्यवेक्षक देश और 15 संवाद साझेदार हैं। इस प्रकार SCO परिवार में कुल 27 देश शामिल हैं।

इसलिए परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को यह अंतर याद रखना चाहिए कि 27 देशों का मतलब 27 पूर्ण सदस्य देश नहीं है।

2025 के तियानजिन सम्मेलन में संगठन ने अपनी संरचना में बदलाव करते हुए पर्यवेक्षक और संवाद साझेदारों को एकीकृत “SCO Partners” व्यवस्था की दिशा में कदम उठाया और लाओस को नए साझेदार के रूप में स्वीकार किया।


लाओस बना SCO का नया संवाद साझेदार

2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित 25वें SCO Summit के दौरान लाओस को SCO का Dialogue Partner स्वीकार किया गया था।

इसके बाद 2026 में लाओस के Dialogue Partner का दर्जा औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया गया। SCO सचिवालय के अनुसार, 10 जुलाई 2026 को बीजिंग में लाओस को SCO Dialogue Partner का दर्जा देने संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

यह SCO के लगातार बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव को दिखाता है।


25वां SCO Summit 2025 कहां हुआ था?

26वें सम्मेलन से पहले 25वां SCO Summit 2025 चीन के तियानजिन शहर में आयोजित हुआ था।

यह सम्मेलन 2025 में चीन की अध्यक्षता के दौरान हुआ और संगठन की 25वीं वर्षगांठ की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।

तियानजिन सम्मेलन में सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, आर्थिक विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, हरित विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

इस सम्मेलन में SCO के भीतर कई नए सहयोग तंत्रों और संस्थागत पहलों को आगे बढ़ाने पर भी निर्णय लिए गए।


23वां SCO Summit और भारत

भारत ने 23वें SCO Summit की मेजबानी की थी।

यह सम्मेलन 4 जुलाई 2023 को वर्चुअल प्रारूप में आयोजित हुआ था।

भारत ने उस समय सम्मेलन की थीम रखी थी:

“Towards a Secure SCO”

हिंदी में इसका अर्थ है:

“एक सुरक्षित SCO की ओर”

भारत की अध्यक्षता के दौरान आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी, डिजिटल सहयोग और लोगों के बीच संपर्क जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।

यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इसी अवधि में ईरान को SCO की पूर्ण सदस्यता की दिशा में आगे बढ़ाया गया और संगठन का विस्तार जारी रहा।


SCO की आधिकारिक भाषाएं

SCO की आधिकारिक कार्यकारी भाषाएं:

रूसी (Russian)
चीनी (Chinese)

हैं।

यह जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।


SCO Secretariat कहां स्थित है?

SCO का स्थायी सचिवालय बीजिंग, चीन में स्थित है।

यह संगठन का प्रमुख प्रशासनिक और समन्वय केंद्र है।

वहीं SCO के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे यानी Regional Anti-Terrorist Structure (RATS) की Executive Committee का मुख्यालय ताशकंद, उज्बेकिस्तान में है।

RATS का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से संबंधित सहयोग को मजबूत करना है।


SCO का “Shanghai Spirit” क्या है?

SCO की कार्यप्रणाली में “Shanghai Spirit” की अवधारणा को विशेष महत्व दिया जाता है।

इसमें आपसी विश्वास, पारस्परिक लाभ, समानता, परामर्श, सभ्यताओं की विविधता का सम्मान और साझा विकास जैसे सिद्धांत शामिल हैं।

यही भावना SCO को अन्य क्षेत्रीय संगठनों से अलग पहचान देने में मदद करती है।

संगठन का उद्देश्य केवल किसी एक देश के हित को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि सदस्य देशों के बीच संवाद और सहयोग के माध्यम से साझा हितों को बढ़ावा देना है।


SCO भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत के लिए SCO का महत्व कई स्तरों पर है।

सबसे पहले, यह भारत को मध्य एशियाई देशों के साथ सीधे बहुपक्षीय संवाद का मंच देता है।

दूसरा, आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। SCO के सुरक्षा सहयोग के माध्यम से भारत इन विषयों पर अन्य देशों के साथ चर्चा कर सकता है।

तीसरा, मध्य एशिया ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। SCO के माध्यम से भारत आर्थिक और ऊर्जा सहयोग के नए अवसर तलाश सकता है।

चौथा, व्यापार और कनेक्टिविटी भी SCO के एजेंडे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत के लिए मध्य एशिया तक बेहतर संपर्क और व्यापार मार्गों का विकास रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।


26वें SCO Summit 2026 का महत्व

बिश्केक में होने वाला 26वां SCO Summit कई कारणों से महत्वपूर्ण है।

सबसे बड़ा कारण संगठन की 25वीं वर्षगांठ है।

इसके अलावा SCO अब पहले की तुलना में कहीं अधिक बड़ा और व्यापक संगठन बन चुका है। सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक, तकनीकी, डिजिटल और पर्यावरणीय सहयोग भी इसके एजेंडे में शामिल हैं।

2026 की अध्यक्षता के दौरान किर्गिस्तान ने सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, डिजिटलाइजेशन, पर्यावरण और मानवीय संपर्क जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है।

इसलिए बिश्केक सम्मेलन में केवल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे ही नहीं, बल्कि भविष्य में SCO को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाए, इस पर भी ध्यान रहने की उम्मीद है।


SCO और क्षेत्रीय सुरक्षा

SCO की स्थापना के शुरुआती उद्देश्यों में क्षेत्रीय सुरक्षा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया था।

मध्य एशिया और उसके आसपास का क्षेत्र आतंकवाद, उग्रवाद, सीमा सुरक्षा, नशीले पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों का सामना करता रहा है।

SCO के माध्यम से सदस्य देशों के बीच सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग और सूचनाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।

इसी कारण संगठन का RATS ढांचा महत्वपूर्ण माना जाता है।


SCO और आर्थिक सहयोग

समय के साथ SCO का आर्थिक एजेंडा भी काफी विस्तृत हुआ है।

व्यापार, निवेश, परिवहन, ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

2025 के तियानजिन सम्मेलन में SCO Development Bank की दिशा में भी महत्वपूर्ण चर्चा और निर्णय सामने आए थे। साथ ही ऊर्जा, हरित उद्योग और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए नए प्लेटफॉर्म स्थापित करने की पहल की गई।

इससे स्पष्ट है कि SCO अब केवल सुरक्षा आधारित संगठन न रहकर व्यापक क्षेत्रीय सहयोग के मंच के रूप में विकसित हो रहा है।


SCO और कनेक्टिविटी

मध्य एशिया, चीन, रूस और दक्षिण एशिया के बीच परिवहन और व्यापार संपर्क बढ़ाने में SCO की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

रेलवे, सड़क, ऊर्जा पाइपलाइन और अन्य परिवहन परियोजनाएं क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने में मदद कर सकती हैं।

किर्गिस्तान की अध्यक्षता के दौरान चीन-किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे जैसे प्रोजेक्ट को भी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया है।

भारत के लिए भी मध्य एशिया तक पहुंच और वैकल्पिक संपर्क मार्गों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।


प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

SCO से जुड़े निम्न तथ्य विद्यार्थियों को जरूर याद रखने चाहिए:

SCO का पूरा नाम: Shanghai Cooperation Organisation

हिंदी नाम: शंघाई सहयोग संगठन

स्थापना: 15 जून 2001

स्थापना स्थल: शंघाई, चीन

पूर्व संगठन: Shanghai Five

Shanghai Five की शुरुआत: 1996

पहला SCO Summit: 14-15 जून 2001, शंघाई

भारत सदस्य बना: 2017

पाकिस्तान सदस्य बना: 2017

ईरान सदस्य बना: 2023

बेलारूस सदस्य बना: 2024

25वां Summit: तियानजिन, चीन, 2025

26वां Summit: बिश्केक, किर्गिस्तान, 2026

26वें Summit की तारीख: 31 अगस्त–1 सितंबर 2026

2026 की थीम: “25 Years of the SCO: Together Towards Sustainable Peace, Development and Prosperity”

स्थायी सचिवालय: बीजिंग, चीन

RATS मुख्यालय: ताशकंद, उज्बेकिस्तान

आधिकारिक कार्यकारी भाषाएं: रूसी और चीनी

2026 में पूर्ण सदस्य: 10

पर्यवेक्षक: 2

संवाद साझेदार: 15

SCO परिवार: 27 देश


SCO Summit 2026 से जुड़े संभावित प्रश्न

प्रश्न 1. 26वां SCO Summit 2026 कहां आयोजित होगा?

उत्तर: बिश्केक, किर्गिस्तान।

प्रश्न 2. 26वां SCO Summit 2026 कब आयोजित होगा?

उत्तर: 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक।

प्रश्न 3. 2026 में SCO अपनी स्थापना के कितने वर्ष पूरे कर रहा है?

उत्तर: 25 वर्ष।

प्रश्न 4. 2026 SCO Summit की थीम क्या है?

उत्तर: “25 Years of the SCO: Together Towards Sustainable Peace, Development and Prosperity.”

प्रश्न 5. SCO की स्थापना कब हुई थी?

उत्तर: 15 जून 2001।

प्रश्न 6. SCO की स्थापना कहां हुई थी?

उत्तर: शंघाई, चीन।

प्रश्न 7. भारत SCO का पूर्ण सदस्य कब बना?

उत्तर: 2017।

प्रश्न 8. SCO का स्थायी सचिवालय कहां है?

उत्तर: बीजिंग, चीन।

प्रश्न 9. SCO के RATS का मुख्यालय कहां है?

उत्तर: ताशकंद, उज्बेकिस्तान।

प्रश्न 10. SCO की आधिकारिक कार्यकारी भाषाएं कौन-सी हैं?

उत्तर: रूसी और चीनी।


निष्कर्ष

26वां SCO Summit 2026 केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं है, बल्कि संगठन की 25 वर्षों की यात्रा और उसके भविष्य की दिशा तय करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण अवसर है।

बिश्केक में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब SCO का दायरा सुरक्षा सहयोग से आगे बढ़कर अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, कनेक्टिविटी, पर्यावरण और मानवीय सहयोग तक पहुंच चुका है।

भारत के लिए भी यह सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण है। भारत SCO के माध्यम से मध्य एशिया और यूरेशिया के देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने और व्यापार तथा कनेक्टिविटी के अवसरों पर बातचीत करने का प्रयास करता है।

2026 का सम्मेलन SCO की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रहा है, इसलिए इसकी थीम भी संगठन की अब तक की यात्रा और भविष्य की दिशा को दर्शाती है — टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर मिलकर आगे बढ़ना।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण Current Affairs और International Relations विषय है। परीक्षा में SCO की स्थापना, सदस्य देश, भारत की सदस्यता, Summit locations, सचिवालय, RATS, आधिकारिक भाषाएं और 2026 की थीम से जुड़े प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

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नोट: अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सदस्यता, साझेदार देशों और Summit से जुड़ी जानकारी समय के साथ बदल सकती है। परीक्षा या किसी आधिकारिक उपयोग के लिए नवीनतम जानकारी संबंधित आधिकारिक स्रोत से जरूर सत्यापित करें।

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