भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background of the Constitution)
भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background of the Constitution)
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के विनियमन से लेकर ब्रिटिश क्राउन के प्रत्यक्ष शासन और भारतीय स्वतंत्रता तक का इतिहास
1. ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन (Company Rule: 1773-1858)
भारत में ब्रिटिश शासन की शुरुआत मूल रूप से व्यापारिक रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन से हुई थी, परंतु बक्सर के युद्ध (1764) के पश्चात कंपनी को बंगाल, बिहार और ओडिशा के दीवानी अधिकार प्राप्त हो गए। इसके साथ ही कंपनी ने प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप शुरू किया, जिसे नियंत्रित करने के लिए ब्रिटिश संसद ने कई कानून पारित किए:
- 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट (Regulating Act of 1773): यह भारत में कंपनी के कार्यों को नियमित करने की दिशा में ब्रिटिश सरकार का पहला कदम था। इसके द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' नाम दिया गया तथा बंबई और मद्रास के गवर्नरों को उसके अधीन किया गया। भारत के पहले गवर्नर-जनरल **लॉर्ड वारेन हेस्टिंग्स** बने। इसी अधिनियम के तहत **1774 में कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय** की स्थापना की गई, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश (सर एलिजाह इम्पे) और तीन अन्य न्यायाधीश थे।
- 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट (Pitts India Act of 1784): इस अधिनियम ने कंपनी के वाणिज्यिक (Commercial) और राजनीतिक (Political) कार्यों को स्पष्ट रूप से अलग कर दिया। राजनीतिक कार्यों के नियंत्रण के लिए **'नियंत्रण बोर्ड' (Board of Control)** का गठन किया गया, जिससे भारत में द्वैध शासन प्रणाली (Dual Government) का उदय हुआ।
- 1813 का चार्टर अधिनियम (Charter Act of 1813): इसने भारत में कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार (Trade Monopoly) को समाप्त कर दिया, हालांकि चाय और चीन के साथ व्यापार पर एकाधिकार बना रहा। ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार की अनुमति मिली और भारतीयों की शिक्षा के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये का आवंटन किया गया।
- 1833 का चार्टर अधिनियम (Charter Act of 1833): इसने बंगाल के गवर्नर-जनरल को **'भारत का गवर्नर-जनरल'** बना दिया, जिसमें सभी नागरिक और सैन्य शक्तियां निहित थीं। **लॉर्ड विलियम बैंटिक** भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने। इस अधिनियम ने कंपनी की व्यापारिक गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त कर उसे विशुद्ध रूप से एक प्रशासनिक निकाय बना दिया। इसके तहत सिविल सेवकों के चयन के लिए खुली प्रतियोगिता का आयोजन करने का पहला प्रयास किया गया।
- 1853 का चार्टर अधिनियम (Charter Act of 1853): इस अधिनियम ने पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी (Legislative) और प्रशासनिक (Executive) कार्यों को अलग किया। इसके तहत विधान निर्माण के लिए एक पृथक 6-सदस्यीय 'भारतीय विधान परिषद' का गठन हुआ। मैकाले समिति (1854) के सुझावों पर भारतीय सिविल सेवा (ICS) में भर्ती के लिए खुली परीक्षा प्रणाली की शुरुआत की गई।
2. ब्रिटिश क्राउन का शासन (The Crown Rule: 1858-1947)
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (सैनिक विद्रोह) के परिणाम स्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के कुशासन का अंत हुआ और भारत का शासन सीधे ब्रिटिश महारानी के हाथों में स्थानांतरित कर दिया गया:
- भारत सरकार अधिनियम, 1858 (Government of India Act 1858): इसे 'भारत के अच्छे शासन के लिए अधिनियम' कहा गया। इसके तहत भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया। गवर्नर-जनरल का पद बदलकर **'वायसराय' (Viceroy)** कर दिया गया, जो ब्रिटिश क्राउन का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि था। **लॉर्ड कैनिंग** भारत के प्रथम वायसराय बने। बोर्ड ऑफ कंट्रोल और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स को समाप्त कर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) के पद का सृजन हुआ, जिसकी सहायता के लिए 15-सदस्यीय भारत परिषद का गठन किया गया।
- भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 (Indian Councils Act 1861): इसके तहत कानून बनाने की प्रक्रिया में भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल करने की शुरुआत हुई। वायसराय कैनिंग ने 1859 में प्रारंभ की गई **'विभागीय प्रणाली' (Portfolio System)** को कानूनी मान्यता दी। साथ ही वायसराय को आपातकाल में बिना परिषद के अनुमोदन के 'अध्यादेश' (Ordinance) जारी करने की शक्ति दी गई।
- भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 (मार्ले-मिंटो सुधार): लॉर्ड मार्ले भारत सचिव थे और लॉर्ड मिंटो भारत के वायसराय थे। इस अधिनियम ने पहली बार केंद्रीय और प्रांतीय विधानमंडलों में सदस्यों की संख्या बढ़ाई। इसकी सबसे विवादित विशेषता **'सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व' (Separate Electorate)** की शुरुआत थी, जिसके तहत मुस्लिम वर्ग के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था की गई। लॉर्ड मिंटो को 'सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक' के रूप में जाना जाता है। सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा वायसराय की कार्यपालिका परिषद के पहले भारतीय सदस्य (विधि सदस्य) बने।
- भारत सरकार अधिनियम, 1919 (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार): मोंटेग्यू भारत सचिव और चेम्सफोर्ड वायसराय थे। इस अधिनियम ने प्रांतों में **'द्वैध शासन' (Dyarchy)** लागू किया, जिसके तहत प्रांतीय विषयों को 'आरक्षित' (Reserved) और 'हस्तांतरित' (Transferred) वर्गों में विभाजित किया गया। केंद्र में पहली बार **द्विसदनीय व्यवस्था (Bicameralism)** और प्रत्यक्ष निर्वाचन की शुरुआत की गई। इसके द्वारा लोक सेवा आयोग (PSC) के गठन का प्रावधान हुआ, जिसके तहत 1926 में केंद्रीय लोक सेवा आयोग का गठन किया गया।
- भारत सरकार अधिनियम, 1935 (Government of India Act 1935): यह ब्रिटिश संसद द्वारा भारत के लिए पारित सबसे बड़ा और अंतिम लिखित कानून था, जिसने भारतीय संविधान के अधिकांश हिस्से का ढांचा प्रदान किया। इसके मुख्य बिंदु थे:
- एक अखिल भारतीय संघ (All India Federation) की स्थापना का प्रस्ताव (जो रियासतों के शामिल न होने से कभी लागू नहीं हो सका)।
- प्रांतों में द्वैध शासन को समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy) प्रदान की गई।
- केंद्र में द्वैध शासन प्रणाली लागू की गई।
- शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों के माध्यम से किया गया: संघ सूची (59 विषय), राज्य सूची (54 विषय) और समवर्ती सूची (36 विषय)। अवशिष्ट शक्तियां वायसराय के पास रखी गईं।
- वर्ष 1937 में दिल्ली में एक संघीय न्यायालय (Federal Court) की स्थापना की गई, जो बाद में देश का सर्वोच्च न्यायालय बना।
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना का प्रावधान।
- भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947: 3 जून 1947 की माउंटबेटन योजना के आधार पर पारित। इसने 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र संप्रभु डोमिनियन की स्थापना की और भारत पर से ब्रिटिश संप्रभुता को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया।
💡 याद रखने की परीक्षा ट्रिक (Viceroy/Governor General Secrets):
- बंगाल का पहला गवर्नर: रॉबर्ट क्लाइव
- बंगाल का पहला गवर्नर-जनरल: वारेन हेस्टिंग्स (1773 एक्ट)
- भारत का पहला गवर्नर-जनरल: विलियम बैंटिक (1833 एक्ट)
- भारत का पहला वायसराय: लॉर्ड कैनिंग (1858 एक्ट)
- स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल: लॉर्ड माउंटबेटन
- स्वतंत्र भारत के प्रथम एवं अंतिम भारतीय गवर्नर-जनरल: सी. राजगोपालाचारी
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