संविधान सभा का गठन, निर्माण एवं प्रस्तावना (Making of the Constitution & Preamble)
संविधान सभा का गठन, निर्माण एवं प्रस्तावना (Making of the Constitution & Preamble)
कैबिनेट मिशन से लेकर प्रस्तावना के दार्शनिक आधार, विदेशी स्रोतों और अनुसूचियों का गहन विश्लेषण
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दोस्तों यह पोस्ट उन विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है जो कॉम्पिटेटिव एक्जाम या कोई अन्य एग्जाम की तैयारी करते हैं Ex :- UPSC, BPSC, SSC, UPPSC, Railway, Banking, Teacher etc. पूरा जरूर पढ़े
1. संविधान सभा का गठन और महत्वपूर्ण तिथियां (The Constituent Assembly)
भारत के लिए एक संविधान सभा के गठन का विचार सर्वप्रथम 1934 में वामपंथी नेता **एम.एन. रॉय (M.N. Roy)** ने दिया था। इसके पश्चात कांग्रेस ने आधिकारिक मांग की, जिसे अंततः 1946 की **'कैबिनेट मिशन योजना'** (पैथिक लॉरेंस, स्टैफोर्ड क्रिप्स, ए.वी. अलेक्जेंडर की सदस्यता वाली) के तहत स्वीकार किया गया।
- सदस्य संख्या: कैबिनेट मिशन के अनुसार कुल सदस्यों की संख्या 389 तय की गई थी। परंतु देश के विभाजन के बाद सदस्यों की संख्या घटकर 299 रह गई। प्रति 10 लाख की आबादी पर एक सदस्य का अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा किया गया था।
- प्रथम बैठक (9 दिसंबर 1946): नई दिल्ली के संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित की गई। मुस्लिम लीग ने इस बैठक का बहिष्कार किया। सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य **डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा** को सर्वसम्मति से **अस्थाई अध्यक्ष** चुना गया।
- स्थाई अध्यक्ष का चुनाव (11 दिसंबर 1946): **डॉ. राजेंद्र प्रसाद** को संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष और एच.सी. मुखर्जी को उपाध्यक्ष चुना गया। **सर बी.एन. राव** को संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया।
- उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution - 13 दिसंबर 1946): पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ऐतिहासिक उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया, जिसने भावी संविधान की संरचना के दार्शनिक मूल्य और लक्ष्यों को स्थापित किया। इसे 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से पारित किया गया और यही बाद में भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना।
- प्रारूप समिति (Drafting Committee): संविधान के प्रारूप को तैयार करने के लिए 29 अगस्त 1947 को इस 7-सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष **डॉ. भीमराव अंबेडकर** थे। उन्हें 'भारतीय संविधान का जनक' कहा जाता है।
- संविधान को अंगीकार करना (26 नवंबर 1949): संविधान सभा ने संविधान के निर्माण में कुल **2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन** का समय लिया। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा इसे अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया। इस दिन संविधान सभा के कुल 284 उपस्थित सदस्यों (जिनमें 15 महिलाएं थीं) ने हस्ताक्षर किए। इसी दिन को 'संविधान दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
- पूर्णतः लागू होना (26 जनवरी 1950): संविधान को पूर्णतः 26 जनवरी 1950 को लागू कर भारत को एक 'गणतंत्र' घोषित किया गया। 26 जनवरी की तिथि इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसी दिन 1930 में लाहौर अधिवेशन के बाद कांग्रेस ने प्रथम स्वतंत्रता दिवस (पूर्ण स्वराज्य दिवस) मनाया था।
2. संविधान की प्रस्तावना (The Preamble of the Constitution)
प्रस्तावना संविधान के सार, दर्शन और आकांक्षाओं को दर्शाती है। प्रसिद्ध विधिवेत्ता एन.ए. पालकीवाला ने इसे 'संविधान का परिचय पत्र' कहा था।
- प्रस्तावना के पांच मुख्य आधार: **संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न (Sovereign)** - भारत आंतरिक और बाह्य निर्णयों में स्वतंत्र है; **समाजवादी (Socialist)** - लोकतांत्रिक समाजवादी व्यवस्था; **पंथनिरपेक्ष (Secular)** - राज्य का कोई राजकीय धर्म नहीं है, सभी धर्मों को समान आदर प्राप्त है; **लोकतांत्रिक (Democratic)** - जनता द्वारा चुनी गई शासन प्रणाली; **गणराज्य (Republic)** - देश का राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति) वंशानुगत न होकर निर्वाचित होता है।
- प्रस्तावना में निहित न्याय, स्वतंत्रता व समता: - **तीन प्रकार का न्याय:** सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक। - **पांच प्रकार की स्वतंत्रता:** विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना। - **दो प्रकार की समता:** प्रतिष्ठा और अवसर की समता।
- प्रस्तावना में संशोधन (42वां संविधान संशोधन, 1976): प्रस्तावना में केवल एक बार संशोधन किया गया है, जिसके द्वारा इसमें तीन नए शब्द जोड़े गए: **'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता'**।
- ऐतिहासिक वाद (Judicial Interpretation): - *बेरुबारी वाद (1960):* न्यायालय ने निर्णय दिया कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है, इसलिए इसमें संशोधन नहीं हो सकता। - *केशवानंद भारती वाद (1973):* 13 न्यायाधीशों की सबसे बड़ी बेंच ने निर्णय दिया कि **प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है**। संसद इसमें संशोधन कर सकती है परंतु इसके **'मूल ढांचे' (Basic Structure)** में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
3. भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएं और स्रोत (Salient Features & Sources)
भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है। यह नम्यता (Flexible) और अनम्यता (Rigid) का अनोखा मिश्रण है। इसके विभिन्न स्रोतों को दुनिया के लगभग 60 देशों से ग्रहण किया गया है:
| स्रोत देश | गृहीत संवैधानिक प्रावधान |
|---|---|
| ब्रिटेन (UK) | संसदीय शासन प्रणाली, एकल नागरिकता (Single Citizenship), विधि का शासन (Rule of Law), द्विसदनीय व्यवस्था, विधायी प्रक्रिया, मंत्रिमंडल प्रणाली, परमाधिकार लेख (Writs)। |
| अमेरिका (USA) | **मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)**, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, **न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review)** का सिद्धांत, राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment), उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की विधि, उपराष्ट्रपति का पद। |
| आयरलैंड | **राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP)**, राष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा 12 विशिष्ट सदस्यों का मनोनयन। |
| कनाडा | सशक्त केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था, अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र में निहित होना, राज्यपालों की नियुक्ति, सर्वोच्च न्यायालय का परामर्शी न्यायनिर्णयन। |
| ऑस्ट्रेलिया | **समवर्ती सूची (Concurrent List)**, प्रस्तावना की भाषा, दोनों सदनों की **संयुक्त बैठक (Joint Sitting)**, व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता। |
| सोवियत संघ (पूर्व USSR) | **मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)**, प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के आदर्श। |
| दक्षिण अफ्रीका | **संविधान संशोधन की प्रक्रिया (Amendment Process under Art. 368)**, राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन। |
| जर्मनी | आपातकाल के समय मौलिक अधिकारों का स्थगन (Suspension of Fundamental Rights during Emergency)。 |
4. संविधान की 12 अनुसूचियां (The 12 Schedules of the Constitution)
मूल संविधान में कुल 8 अनुसूचियां थीं, वर्तमान में संशोधन के पश्चात कुल 12 अनुसूचियां हैं:
- पहली अनुसूची: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम और उनकी भौगोलिक सीमाएं।
- दूसरी अनुसूची: राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा अध्यक्ष, न्यायाधीशों आदि के वेतन, भत्ते और पेंशन।
- तीसरे अनुसूची: मंत्रियों, सांसदों और न्यायाधीशों द्वारा ली जाने वाली शपथ और प्रतिज्ञान।
- चौथी अनुसूची: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए राज्यसभा में सीटों का आवंटन।
- पांचवीं अनुसूची: अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण के प्रावधान।
- छठी अनुसूची: **असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम (AMTM)** राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में प्रावधान।
- सातवीं अनुसूची: संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन (संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची)।
- आठवीं अनुसूची: संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त **22 आधिकारिक भाषाएं**। (मूल रूप से 14 भाषाएं थीं)।
- नौवीं अनुसूची (पहला संशोधन, 1951): भूमि सुधार और जमींदारी उन्मूलन से संबंधित अधिनियम जिन्हें न्यायिक समीक्षा से संरक्षण प्राप्त था।
- दसवीं अनुसूची (52वां संशोधन, 1985): **दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law)** के आधार पर संसद और विधानसभा सदस्यों की अयोग्यता।
- 11वीं अनुसूची (73वां संशोधन, 1992): **पंचायती राज** की शक्तियां और जिम्मेदारियां (इसमें कुल **29 विषय** हैं)।
- 12वीं अनुसूची (74वां संशोधन, 1992): **नगरपालिकाओं** की शक्तियां और जिम्मेदारियां (इसमें कुल **18 विषय** हैं)।
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