मौर्य साम्राज्य, अशोक के अभिलेख एवं गुप्त स्वर्णकाल (The Maurya & Gupta Empires) || मध्यकालीन भारत: दिल्ली सल्तनत एवं मुगल साम्राज्य (The Medieval Era)
मौर्य साम्राज्य, अशोक के अभिलेख एवं गुप्त स्वर्णकाल (The Maurya & Gupta Empires)
भारत के प्रथम केंद्रीकृत साम्राज्य, मौर्य प्रशासन, धम्म नीति, गुप्त प्रशासन एवं शास्त्रीय साहित्य व विज्ञान का स्वर्णयुग
1. मौर्य साम्राज्य की स्थापना एवं कौटिल्य का अर्थशास्त्र (The Mauryas)
छठी शताब्दी ई.पू. में उदित 16 महाजनपदों में से मगध सबसे शक्तिशाली बनकर उभरा। मगध पर हर्यक वंश, शिशुनाग वंश और नंद वंश का शासन रहा। नंद वंश के अंतिम अत्याचारी शासक घनानंद को पराजित कर 322 ई.पू. में चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने गुरु चाणक्य (कौटिल्य / विष्णुगुप्त) की सहायता से भारत के प्रथम विशाल साम्राज्य 'मौर्य साम्राज्य' की नींव रखी। चंद्रगुप्त मौर्य ने यूनानी सेनापति सेल्यूकस निकेटर को पराजित किया और उसकी पुत्री हेलेना से विवाह किया। सेल्यूकस ने अपने राजदूत मेगास्थनीज (Megasthenes) को चंद्रगुप्त के दरबार में भेजा था, जिसने प्रसिद्ध पुस्तक 'इंडिका' (Indica) लिखी।
कौटिल्य का अर्थशास्त्र: यह पुस्तक अर्थशास्त्र (Economics) पर नहीं, बल्कि लोक प्रशासन, राजनीति और शासन कला (Statecraft) पर लिखी गई प्राचीन भारत की सबसे महान रचना है। इसमें राज्य के संचालन के लिए 'सप्तांग सिद्धांत' (Seven Organs of State) दिया गया है, जिसके अनुसार राज्य के 7 अंग हैं: स्वामी (राजा), अमात्य (मंत्री), जनपद (क्षेत्र व जनता), दुर्ग (किला), कोष (खजाना), दंड (सेना), और मित्र।
📜 अशोक महान और उनकी 'धम्म' नीति (Ashoka's Dhamma):
बिन्दुसार के पुत्र अशोक महान (269-232 ई.पू.) ने अपने राज्याभिषेक के 8वें वर्ष यानी 261 ई.पू. में कलिंग युद्ध लड़ा। युद्ध की भयंकर नरसंहार और रक्तपात को देखकर अशोक का हृदय द्रवित हो गया। उन्होंने 'भेरीघोष' (युद्ध नीति) को त्याग कर 'धम्मघोष' (सांस्कृतिक विजय / नैतिक आचरण) की नीति अपनाई और उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षु से बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। अशोक भारत के पहले ऐसे सम्राट थे जिन्होंने पत्थरों, स्तंभों और गुफाओं पर उत्कीर्ण शिलालेखों (Inscriptions) के माध्यम से अपनी प्रजा को सीधे संबोधित किया।
2. अशोक के शिलालेखों की भाषा, लिपि और खोज
अशोक के अभिलेख मुख्य रूप से चार लिपियों में पाए गए हैं, जो उनके साम्राज्य की बहुसांस्कृतिक और विशाल सीमा को दर्शाते हैं:
- ब्राह्मी लिपि (Brahmi): भारत में पाए गए अधिकांश अभिलेख इसी लिपि में हैं। यह बाएं से दाएं लिखी जाती थी।
- खरोष्ठी लिपि (Kharosthi): पश्चिमोत्तर भारत (मानसेहरा और शाहबाजगढ़ी) में। यह लिपि दाएं से बाएं लिखी जाती थी।
- ग्रीक और आरामाइक लिपि (Greek & Aramaic): अफगानिस्तान (जैसे शारे-कुना द्विभाषी अभिलेख) में पाई गई।
⚠️ परीक्षा अलर्ट (Most Repeated Inscription Facts):
1. सर्वप्रथम पठन: अशोक के शिलालेखों को पढ़ने में पहली बार सफलता वर्ष 1837 में ब्रिटिश विद्वान जेम्स प्रिंसेप (James Prinsep) को मिली थी, जबकि इन अभिलेखों की खोज सर्वप्रथम 1750 में टीफेंथेलर ने की थी।
2. कलिंग युद्ध का वर्णन अशोक के किस शिलालेख में मिलता है? उत्तर है: 13वें वृहद् शिलालेख (13th Major Rock Edict) में।
3. अशोक का नाम वास्तविक 'अशोक' केवल चार लघु शिलालेखों - मास्की (कर्नाटक), गुर्जरा (मध्य प्रदेश), नेतूर और उदयगोलम में मिलता है। अन्य सभी अभिलेखों में उन्हें 'देवानांप्रिय प्रियदर्शी' (देवताओं का प्यारा देखने में सुंदर) कहा गया है।
3. गुप्त काल: कला, साहित्य और विज्ञान का स्वर्ण युग (Gupta Golden Age)
मौर्यों के पतन के बाद भारत में राजनीतिक विकेंद्रीकरण का दौर आया, जिसे कुषाणों और सातवाहनों ने संभाला। तदुपरान्त चौथी शताब्दी ईस्वी में मगध की भूमि पर 'गुप्त साम्राज्य' का उदय हुआ, जिसकी स्थापना श्रीगुप्त ने की थी। परंतु गुप्त वंश का वास्तविक संस्थापक और प्रथम स्वतंत्र महाराजाधिराज चंद्रगुप्त प्रथम (319 ईस्वी) था, जिसने 'गुप्त संवत्' की शुरुआत की थी।
गुप्त काल को सांस्कृतिक और वैज्ञानिक उन्नति के कारण प्राचीन भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' (Golden Age) कहा जाता है। इस काल के प्रमुख शासक और उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:
- समुद्रगुप्त (335-375 ई.): अपनी असाधारण सैन्य विजयों और कभी न हारने वाले अभियान के कारण इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने समुद्रगुप्त को 'भारत का नेपोलियन' कहा था। समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित 'प्रयाग प्रशस्ति' (Allahabad Pillar Inscription) से उसकी विजयों का विस्तृत ब्यौरा मिलता है। समुद्रगुप्त संगीत प्रेमी था, जिसे उसके सिक्कों पर वीणा बजाते हुए दिखाया गया है। उसने 'कविराज' की उपाधि भी धारण की थी।
- चंद्रगुप्त द्वितीय 'विक्रमादित्य' (375-415 ई.): उसने शकों (Scythians) को पराजित कर 'शकारि' की उपाधि ली और चाँदी के सिक्के जारी किए। उसके दरबार की शोभा बढ़ाने वाले नौ रत्नों का समूह 'नवरत्न' (Navaratnas) कहलाता था। इन नवरत्नों में महान संस्कृत कवि कालिदास (अभिज्ञानशाकुंतलम, मेघदूतम् के रचयिता), खगोलविद् वराहमिहिर, अमरसिंह (अमरकोश), और चिकित्सक धन्वंतरि शामिल थे। चीनी यात्री फाह्यान (Fahien) इसी के शासनकाल में भारत आया था।
- कुमारगुप्त प्रथम: इसने बिहार में सुप्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University) की स्थापना की थी, जो बौद्ध धर्म के महायान दर्शन की शिक्षा का विश्वप्रसिद्ध केंद्र बना।
- स्कंदगुप्त: इसके समय में मध्य एशिया की बर्बर जाति 'हूणों का आक्रमण' (Hunas Invasion) हुआ। स्कंदगुप्त ने वीरतापूर्वक लड़ते हुए हूणों को पराजित किया और खदेड़ दिया, जिसका उल्लेख उसके जूनागढ़ और भितरी स्तंभ लेख में मिलता है।
🔬 गुप्तकालीन विज्ञान और खगोलशास्त्र (Science & Technology):
आर्यभट्ट: गुप्तकाल के सबसे महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। उन्होंने 'सूर्यसिद्धांत' और 'आर्यभटीय' नामक पुस्तकों की रचना की। उन्होंने पहली बार वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है जिससे दिन-रात होते हैं, तथा चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण का वास्तविक कारण राहु-केतु नहीं, बल्कि पृथ्वी और चंद्रमा की छाया का पड़ना है। उन्होंने शून्य (Zero) और दशमलव प्रणाली तथा पाई (π = 3.1416) का मान प्रतिपादित किया।
वराहमिहिर: इन्होंने पंचसिद्धांतिका और वृहत्संहिता की रचना की जो खगोल विज्ञान, भौतिक भूगोल और मौसम विज्ञान के प्रारंभिक ग्रंथ हैं।
मध्यकालीन भारत: दिल्ली सल्तनत एवं मुगल साम्राज्य (The Medieval Era)
तुर्क आक्रमण, सल्तनत काल के पांच वंश, प्रशासनिक सुधार, मुगल साम्राज्य की वास्तुकला एवं शेरशाह सूरी के ऐतिहासिक सुधार
1. दिल्ली सल्तनत का उदय और प्रमुख राजवंश (Delhi Sultanate)
भारत पर पहला मुस्लिम आक्रमण 712 ई. में मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर किया था। इसके उपरान्त महमूद गजनवी (जिसने 1025 ई. में सोमनाथ मंदिर पर भयंकर लूटपाट की) और मोहम्मद गोरी के आक्रमणों ने भारत में मुस्लिम राज्य का मार्ग प्रशस्त किया। 1191 और 1192 के तराइन के प्रथम और द्वितीय युद्ध में गोरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच निर्णायक टक्कर हुई। तराइन के द्वितीय युद्ध में गोरी की विजय के साथ ही भारत में तुर्की साम्राज्य स्थापित हुआ। मोहम्मद गोरी के गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने वर्ष 1206 में गुलाम वंश की स्थापना की, जिसके साथ ही 'दिल्ली सल्तनत' (1206 ई. से 1526 ई.) का इतिहास प्रारंभ हुआ।
दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत कुल पांच वंशों ने शासन किया, जिन्हें क्रमानुसार याद रखना अति-महत्वपूर्ण है:
| वंश (Dynasty) | शासन काल (Period) | संस्थापक (Founder) | प्रसिद्ध शासक एवं उनके कीर्तिमान (Key Events) |
|---|---|---|---|
| 1. गुलाम वंश (Mamluk) | 1206 - 1290 ई. | कुतुबुद्दीन ऐबक | - ऐबक: लाखबख्श कहा गया। कुतुबमीनार और अढ़ाई दिन का झोंपड़ा बनवाया। - इल्तुतमिश: सल्तनत का वास्तविक संस्थापक। इक्ता प्रणाली शुरू की, तुर्कान-ए-चहलगानी (चालीसा दल) बनाया। - रजिया सुल्तान: भारत की प्रथम और एकमात्र महिला मुस्लिम शासक। - बलबन: चालीसा दल को समाप्त किया, 'लौह एवं रक्त' (Iron & Blood) की नीति अपनाई, सिजदा व पाबोस प्रथा तथा नवरोज त्योहार शुरू किया। |
| 2. खिलजी वंश (Khalji) | 1290 - 1320 ई. | जलालुद्दीन खिलजी | - अलाउद्दीन खिलजी: सबसे प्रसिद्ध। उसने सिकंदर-ए-सानी (द्वितीय सिकंदर) की उपाधि ली। सेना को नकद वेतन देने की प्रथा, सैनिकों का हुलिया लिखने और घोड़ों को दागने (दाग प्रथा) की शुरुआत की। - बाजार नियंत्रण प्रणाली (Market Control): वस्तुओं के मूल्य को नियंत्रित करने के लिए 'शहना-ए-मंडी' नामक विभाग बनाया जो जमाखोरी और कालाबाजारी को पूरी तरह रोकता था। |
| 3. तुगलक वंश (Tughlaq) | 1320 - 1414 ई. | गयासुद्दीन तुगलक | - गयासुद्दीन: नहरों का निर्माण कराने वाला पहला सुल्तान। - मोहम्मद बिन तुगलक (MBT): अत्यधिक विद्वान परंतु असफल योजनाओं के कारण 'पागल / स्वप्नशील' सुल्तान कहा गया। उसकी 5 प्रसिद्ध गलतियाँ: राजधानी दिल्ली से दौलताबाद (देवगिरि) स्थानान्तरित करना, सांकेतिक तांबे की मुद्रा (Token Currency) जारी करना, खुरासान अभियान, और कराचिल अभियान। इसी के काल में अफ्रीकी यात्री इब्नबतूता (Ibny Batuta) भारत आया जिसने 'रेहला' नामक पुस्तक लिखी। - फिरोज शाह तुगलक (FST): ब्राह्मणों पर जज़िया कर लगाने वाला पहला सुल्तान, कई नए शहरों (जौनपुर, फिरोजाबाद) का संस्थापक, सर्वाधिक गुलामों (दीवान-ए-बंदगी) का संरक्षक। |
| 4. सैयद वंश (Sayyid) | 1414 - 1451 ई. | खिज्र खाँ | स्वयं को पैगंबर मोहम्मद का वंशज माना, 'रैयत-ए-आला' की उपाधि धारण की। सल्तनत का सबसे कमजोर वंश। |
| 5. लोदी वंश (Lodi) | 1451 - 1526 ई. | बहलोल लोदी | - दिल्ली सल्तनत का पहला अफगान वंश। - सिकंदर लोदी: 1504 में आगरा शहर की स्थापना की और उसे अपनी राजधानी बनाया, गज-ए-सिकंदरी (भूमि मापने का पैमाना) शुरू किया। - इब्राहिम लोदी: अंतिम सुल्तान, पानीपत के प्रथम युद्ध में मारा गया। |
🔥 सल्तनत काल के पांच वंशों को याद रखने की जादुई ट्रिक (Mnemonics):
ट्रिक वाक्य: "गु-खि-तु-सै-लो" या "गुलाब खिले तो सांस लो" ➔ गुलाब (गुलाम वंश), खिले (खिलजी वंश), तो (तुगलक वंश), सांस (सैयद वंश), लो (लोदी वंश)।
2. मुगल साम्राज्य का इतिहास (बाबर से औरंगज़ेब तक - 1526-1707 ई.)
वर्ष 1526 में लड़ा गया 'पानीपत का प्रथम युद्ध' (First Battle of Panipat) भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण युगांतकारी युद्धों में से एक है। इस युद्ध में मध्य एशिया के मुगल आक्रांता बाबर ने अपनी श्रेष्ठ सैन्य कूटनीति, तुलुगमा युद्ध पद्धति (Tulughma System) और भारत में पहली बार बड़े पैमाने पर तोपखाने व बारूद का उपयोग करते हुए दिल्ली सल्तनत के अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोदी को पराजित कर मार डाला। इसके साथ ही दिल्ली सल्तनत समाप्त हुई और भारत में शक्तिशाली 'मुगल साम्राज्य' की स्थापना हुई।
बाबर के बाद उसके पुत्र हुमायूं ने शासन किया, जिसे बीच में शेरशाह सूरी (सूर वंश) ने चौसा (1539) और कन्नौज (1540) के युद्ध में पराजित कर 15 वर्षों के लिए देशनिकाला दे दिया। हुमायूं की मृत्यु के बाद उसका अल्पवयस्क पुत्र अकबर महान गद्दी पर बैठा।
👑 अकबर महान के धर्मनिरपेक्ष और प्रशासनिक सुधार (Akbar's Rule):
अकबर ने भारत में राष्ट्रीय एकता और सर्वधर्म समभाव (धर्मनिरपेक्षता) के लिए 'सुलह-ए-कुल' (सार्वभौमिक शांति) की नीति अपनाई। उसने हिंदुओं पर लगने वाले धार्मिक कर 'जज़िया कर' को 1564 में पूरी तरह समाप्त कर दिया तथा तीर्थयात्रा कर भी हटा दिया।
उसने 1575 में फतेहपुर सीकरी में 'इबादतखाना' (प्रार्थना गृह) की स्थापना की, जहाँ सभी धर्मों के विद्वान धार्मिक चर्चा करते थे। 1582 में उसने एक नवीन समन्वयवादी धर्म 'दीन-ए-इलाही' (Tauhid-i-Ilahi) की घोषणा की, जिसे स्वीकार करने वाला एकमात्र और पहला हिंदू राजा 'बीरबल' था।
प्रशासनिक स्तर पर अकबर ने 'मनसबदारी प्रथा' (Mansabdari System) की शुरुआत की, जो मंगोलों की दशमलव प्रणाली पर आधारित सेना और नागरिक अधिकारियों का पदानुक्रम तय करती थी। राजस्व व्यवस्था के लिए उसने राजा टोडरमल की सहायता से 'दहसाला प्रणाली' (Aini-Dahsala) लागू की, जो पिछले 10 वर्षों की पैदावार और मूल्यों पर आधारित भू-राजस्व का आकलन करती थी।
3. मुगल शासक, उनकी उपाधियाँ, कृतियाँ एवं विदेशी यात्री
अकबर के बाद जहाँगीर, शाहजहाँ और औरंगज़ेब का शासन रहा। उनके काल के साहित्यिक, वास्तुकलात्मक और राजनीतिक घटनाक्रम निम्नलिखित तालिका में स्पष्ट रूप से समेकित किए गए हैं:
| मुगल सम्राट (Ruler) | महत्वपूर्ण कालखंड / स्वर्णयुग | साहित्य / आत्मकथा (Literary Works) | विदेशी यात्री आगमन (Foreign Travelers) | मुख्य वास्तुकला / घटनाएं |
|---|---|---|---|---|
| बाबर (Babur) | 1526 - 1530 ई. | 'तुजुक-ए-बाबरी' (बाबरनामा) - तुर्की भाषा में स्वयं द्वारा लिखित। | -- | पानीपत (1526), खानवा (1527), चंदेरी (1528) और घाघरा (1529) के युद्धों में लगातार विजय। |
| हुमायूं (Humayun) | 1530-40 व 1555-56 ई. | 'हुमायूंनामा' - उनकी बहन गुलबदन बेगम द्वारा लिखित। | -- | चौसा के युद्ध में पराजय। दीनपनाह पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर उसकी मृत्यु हुई। लेनपुल ने लिखा- "वह जिंदगी भर लड़खड़ाता रहा और लड़खड़ाते हुए ही उसकी मौत हो गई।" |
| अकबर (Akbar) | 1556 - 1605 ई. | 'अकबरनामा' व 'आईन-ए-अकबरी' - दरबारी कवि अबुल फजल द्वारा फारसी में लिखित। | राल्फ फिच (Ralph Fitch) - अकबर के दरबार में आने वाला पहला अंग्रेज। | फतेहपुर सीकरी, बुलंद दरवाजा (गुजरात विजय की स्मृति में), आगरा का किला, इलाहाबाद का किला। |
| जहाँगीर (Jahangir) | 1605 - 1627 ई. (चित्रकला का स्वर्ण युग) | 'तुजुक-ए-जहाँगीरी' - स्वयं द्वारा फारसी में प्रारंभ की गई आत्मकथा। | कैप्टन विलियम हॉकिन्स (1608) और सर थॉमस रो (1615) - ब्रिटिश राजदूत जेम्स प्रथम के पत्र के साथ आए। | न्याय की प्रसिद्ध जंजीर (सोने की जंजीर) लगाई। चित्रकला के महान पारखी थे। इनके दरबार में उस्ताद मंसूर पक्षी चित्रकार थे। सिख गुरु अर्जुन देव को फांसी दी। |
| शाहजहाँ (Shah Jahan) | 1627 - 1658 ई. (स्थापत्य कला का स्वर्ण युग) | शाहजहाँनामा - इनायत खाँ द्वारा लिखित। | बर्नियर (चिकित्सक), टैवर्नियर (जौहरी), पीटर मुंडी। | ताजमहल (आगरा), लाल किला (दिल्ली), जामा मस्जिद (दिल्ली), मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस)। |
| औरंगज़ेब (Aurangzeb) | 1658 - 1707 ई. | फतावा-ए-आलमगीरी - इस्लामी कानूनों का महान संकलन। | मनूची (इतालवी लेखक)। | स्वयं को 'जिंदा पीर' कहता था। अत्यधिक रूढ़िवादी। जज़िया कर पुनः चालू किया (1679)। सिखों के 9वें गुरु तेग बहादुर की हत्या करवाई। इसके बाद मुगल साम्राज्य का तेजी से पतन हुआ। |
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