पाषाण काल एवं सिंधु घाटी सभ्यता (The Stone Age & Indus Valley Civilization) || वैदिक सभ्यता, षडदर्शन एवं बौद्ध व जैन धर्म का उदय (Vedic Culture & Heterodox Sects)
पाषाण काल एवं सिंधु घाटी सभ्यता (The Stone Age & Indus Valley Civilization)
मानव सभ्यता के क्रमिक विकास से लेकर कांस्य युग की सबसे उन्नत नगरीय सभ्यता का प्रामाणिक अध्ययन
1. पाषाण काल का त्रि-स्तरीय विभाजन (Stone Age - Threefold Division)
भारतीय प्रागैतिहासिक इतिहास को समझने के लिए पाषाण काल को उपकरणों के निर्माण, जलवायु परिवर्तन और मानव जीवन शैली के आधार पर तीन प्रमुख चरणों में विभाजित किया जाता है:
- पुरापाषाण काल (Paleolithic Age - प्रारंभ से 10,000 ई.पू. तक): इस युग में मानव पूरी तरह से शिकारी (Hunter) और खाद्य संग्राहक (Food Gatherer) था। कृषि और पशुपालन का ज्ञान नहीं था। पत्थर के बड़े और खुरदरे औजारों (क्वार्टजाइट पत्थर) का उपयोग होता था। इस काल की सबसे बड़ी उपलब्धि 'आग की खोज' थी, हालांकि इसका नियमित उपयोग उत्तर-पाषाण काल में जाकर शुरू हुआ। मध्य प्रदेश की भीमबेटका गुफाएं (Bhimbetka Caves) इस काल के शैलचित्रों का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
- मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age - 10,000 ई.पू. से 6000 ई.पू. तक): जलवायु गर्म और शुष्क होने से छोटे आकार के तीखे उपकरणों का विकास हुआ, जिन्हें 'माइक्रोलिथ' (Microliths / लघु पाषाण उपकरण) कहा जाता है। इस काल में मनुष्य ने सर्वप्रथम 'पशुपालन' (Animal Husbandry) की शुरुआत की। पशुपालन के सबसे प्राचीन साक्ष्य राजस्थान के बागोर (Bagor) और मध्य प्रदेश के आदमगढ़ (Adamgarh) से प्राप्त होते हैं। मनुष्य का सबसे पहला पालतू पशु कुत्ता था।
- नवपाषाण काल (Neolithic Age - 6,000 ई.पू. से 1,000 ई.पू. तक): यह मानव इतिहास का एक क्रांतिकारी काल था जिसे गॉर्डन चाइल्ड ने 'नवपाषाणिक क्रांति' कहा है। इस काल में मनुष्य ने स्थायी निवास की शुरुआत की, क्योंकि उसने 'कृषि कार्य' प्रारंभ कर दिया था। साथ ही पहिये का आविष्कार (Wheel Invention) और चाक पर बने मिट्टी के बर्तनों (मृद्भांड) का उपयोग इसी काल की देन है। कश्मीर स्थित बुर्जहोम (Burzahom) से 'गर्त आवास' (गड्ढों वाले घर) और मालिक के शव के साथ पालतू कुत्ते को दफनाने के साक्ष्य मिले हैं। भारत में कृषि का सबसे प्राचीनतम साक्ष्य नवपाषाणिक स्थल मेहरगढ़ (Mehrgarh, वर्तमान पाकिस्तान) से गेहूं और जौ की खेती के रूप में मिलता है, जो लगभग 7000 ई.पू. का है।
💡 महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य (Prehistory Discoveries):
भारत में प्रागैतिहासिक खोजों का जनक रॉबर्ट ब्रूस फुट (Robert Bruce Foote) को माना जाता है। उन्होंने वर्ष 1863 में मद्रास के निकट 'पल्लवरम' नामक स्थान पर पहला पाषाणकालीन हाथ की कुल्हाड़ी (Hand-axe) खोजी थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के प्रथम महानिदेशक सर अलेक्जेंडर कनिंघम को 'भारतीय पुरातत्व का जनक' कहा जाता है।
2. सिंधु घाटी सभ्यता का स्वरूप एवं नगर नियोजन (Indus Valley Civilization)
सिंधु घाटी सभ्यता एक कांस्ययुगीन (Bronze Age) और भारत की प्रथम नगरीय सभ्यता थी। रेडियोकार्बन (C-14) विश्लेषण के अनुसार इसका सर्वमान्य काल 2500 ई.पू. से 1750 ई.पू. तक माना जाता है। इस सभ्यता की खोज का श्रेय रायबहादुर दयाराम साहनी को जाता है, जिन्होंने वर्ष 1921 में तत्कालीन भारतीय पुरातत्व विभाग के महानिदेशक सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में 'हड़प्पा' नामक स्थल का उत्खनन किया था। इसी कारण इसे 'हड़प्पा सभ्यता' भी कहा जाता है।
नगर नियोजन (Town Planning): सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे विशिष्ट विशेषता इसका अद्वितीय नगर नियोजन और जल निकासी प्रणाली (Drainage System) थी। नगर मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित थे - पश्चिमी टीला (दुर्ग या सिटाडेल, जहाँ शासक वर्ग रहता था) और पूर्वी टीला (निचला शहर, जहाँ आम जनता रहती थी)। सड़कें एक-दूसरे को समकोण (90 डिग्री) पर काटती थीं, जिसे 'ग्रिड पद्धति' (Grid System) या ऑक्सफोर्ड सर्कस कहा जाता है। घर पक्की ईंटों के बने होते थे, जिनके दरवाजे मुख्य सड़क के बजाय पीछे गलियों में खुलते थे (लोथल इसका अपवाद था, जहाँ दरवाजे मुख्य सड़क पर खुलते थे)। प्रत्येक घर में रसोईघर, स्नानागार और जल निकासी की नालियाँ होती थीं जो मुख्य नाले से ढकी हुई जुड़ी थीं।
3. प्रमुख हड़प्पाकालीन स्थल एवं महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजें
सिंधु सभ्यता का भौगोलिक विस्तार अत्यंत व्यापक था, जो पश्चिम में सुतकागेंडोर (बलूचिस्तान) से पूर्व में आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश) तथा उत्तर में मांडा (जम्मू-कश्मीर) से दक्षिण में दैमाबाद (महाराष्ट्र) तक फैला था। परीक्षाओं में प्रमुख स्थलों और वहाँ से मिले साक्ष्यों के बारे में बार-बार पूछा जाता है:
| स्थल का नाम | नदी व स्थिति | उत्खननकर्ता (वर्ष) | महत्वपूर्ण प्राप्त साक्ष्य (Archaeological Finds) |
|---|---|---|---|
| हड़प्पा (Harappa) | रावी नदी, मंटगोमरी (पंजाब, पाकिस्तान) | दयाराम साहनी (1921) | अन्नागार (Granary), कांस्य की इक्का गाड़ी, शंख का बना बैल, आर-37 कब्रिस्तान। |
| मोहनजोदड़ो (Mohenjo-daro) | सिंधु नदी, लरकाना (सिंध, पाकिस्तान) | राखालदास बनर्जी (1922) | विशाल स्नानागार (Great Bath), कांस्य की नर्तकी की मूर्ति, पशुपति शिव की मुहर, दाढ़ी वाले पुरोहित की मूर्ति। (अर्थ: मृतकों का टीला) |
| लोथल (Lothal) | भोगवा नदी, अहमदाबाद (गुजरात) | एस. आर. राव (1954) | गोदीवाड़ा (Dockyard / बंदरगाह), चावल के साक्ष्य, फारस की मुहर, हाथीदांत का पैमाना, युगल शवाधान (सती प्रथा का संकेत)। |
| कालीबंगा (Kalibangan) | घग्घर नदी, हनुमानगढ़ (राजस्थान) | अमलानंद घोष, बी.बी. लाल | जुते हुए खेत के साक्ष्य, भूकंप के सबसे प्राचीन साक्ष्य, अग्निकुंड/हवन कुंड, चूड़ी निर्माण का कारखाना। (अर्थ: काले रंग की चूड़ियाँ) |
| चन्हूदड़ो (Chanhudaro) | सिंधु नदी, सिंध (पाकिस्तान) | एन.जी. मजूमदार (1931) | मनके बनाने का कारखाना (Bead Factory), लिपस्टिक व कंघा (सौंदर्य प्रसाधन), एकमात्र दुर्ग-रहित शहर, वक्राकार ईंटें। |
| धौलावीरा (Dholavira) | कच्छ का रन, गुजरात | जे.पी. जोशी, आर.एस. बिष्ट | नगर का तीन भागों में विभाजन, विशाल जलाशय (Water Reservoir/Water Harvesting System), खेल का मैदान (Stadium)। यूनेस्को विरासत स्थल। |
| बनवाली (Banawali) | रंगोई नदी, हिसार (हरियाणा) | आर.एस. बिष्ट (1974) | मिट्टी का बना हुआ 'हल' का खिलौना (Terracotta Toy-plough), अच्छे किस्म के जौ के दाने। |
🔥 परीक्षा में याद रखने की जादुई तरकीब (Key Points):
- सिंधु सभ्यता के लोगों को लोहे (Iron) का ज्ञान नहीं था। वे तांबे और टिन को मिलाकर कांसा (Bronze) बनाते थे, इसलिए यह कांस्ययुगीन सभ्यता थी। परीक्षा में अकसर पूछा जाता है कि क्या वे लोहे, शेर या मंदिर से परिचित थे? उत्तर है: नहीं, वे लोहे, शेर और मंदिर की पूजा से अपरिचित थे।
- वे मातृदेवी, पशुपति शिव, प्रकृति, वृक्ष (पीपल) और एकश्रृंगी पशु (यूनिकॉर्न) की पूजा करते थे।
- हड़प्पा की लिपि 'भावचित्रात्मक' (Boustrophedon) थी, जो दाईं से बाईं ओर और फिर बाईं से दाईं ओर लिखी जाती थी। यह लिपि आज तक पढ़ी नहीं जा सकी है।
वैदिक सभ्यता, षडदर्शन एवं बौद्ध व जैन धर्म का उदय (Vedic Culture & Heterodox Sects)
ऋग्वैदिक व उत्तरवैदिक समाज, वेदों की दार्शनिक शाखाएँ तथा नास्तिक दर्शन क्रांति का विस्तृत तुलनात्मक पाठ
1. ऋग्वैदिक काल बनाम उत्तरवैदिक काल (Vedic Period Comparison)
सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के बाद भारत में जिस नवीन सभ्यता का विकास हुआ, उसे 'वैदिक सभ्यता' कहा जाता है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण और पशुपालक सभ्यता थी, जिसके निर्माता 'आर्य' थे। 'आर्य' शब्द का अर्थ 'श्रेष्ठ' या 'कुलीन' होता है। मैक्समूलर के अनुसार आर्यों का मूल निवास स्थान मध्य एशिया (Central Asia) था। वैदिक काल को दो भागों में विभाजित किया जाता है:
ऋग्वैदिक काल (1500 ई.पू. - 1000 ई.पू.)
- मुख्य आधार: एकमात्र स्रोत ऋग्वेद है।
- अर्थव्यवस्था: पशुपालन प्राथमिक पेशा था, कृषि गौण (द्वितीयक) थी। गाय सबसे पवित्र पशु थी जिसे 'अघन्या' (न मारने योग्य) कहा गया।
- सामाजिक स्थिति: वर्ण व्यवस्था कर्म पर आधारित थी, जन्म पर नहीं। महिलाओं को उपनयन संस्कार, सभा-समिति में भाग लेने और शिक्षा का अधिकार था। बाल विवाह व पर्दा प्रथा नहीं थी।
- भौगोलिक विस्तार: सप्तसैंधव प्रदेश (पंजाब व हरियाणा क्षेत्र)।
उत्तरवैदिक काल (1000 ई.पू. - 600 ई.पू.)
- मुख्य आधार: यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, ब्राह्मण, उपनिषद।
- क्रांतिकारी खोज: लोहे की खोज (Iron Discovery, लगभग 1000 ई.पू. अतरंजीखेड़ा, यूपी से) जिसने कृषि में हल के उपयोग को बढ़ाया।
- अर्थव्यवस्था: कृषि प्राथमिक पेशा बन गया, स्थायी निवास प्रारंभ हुआ।
- सामाजिक स्थिति: वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित व कठोर हो गई। महिलाओं की स्थिति में गिरावट आई।
- धार्मिक स्थिति: इंद्र और वरुण का स्थान 'प्रजापति' (सृष्टि के निर्माता) ने ले लिया। यज्ञ और कर्मकांड जटिल हो गए।
2. वैदिक साहित्य और भारतीय षडदर्शन (Vedic Literature & Philosophy)
वैदिक साहित्य को 'श्रुति' (सुनकर लिखा गया) कहा जाता है। इसमें चार वेद शामिल हैं:
- ऋग्वेद (Rigveda): यह विश्व का सबसे प्राचीनतम ग्रंथ है। इसमें 10 मंडल और 1028 सूक्त (Hymns) हैं। इसके तीसरे मंडल में सूर्य देवता 'सविता' को समर्पित प्रसिद्ध 'गायत्री मंत्र' है, जिसकी रचना विश्वामित्र ने की थी। इसके 10वें मंडल के 'पुरुषसूक्त' में पहली बार चारों वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) की उत्पत्ति की व्याख्या मिलती है।
- सामवेद (Samaveda): इसे 'भारतीय संगीत का जनक' कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से यज्ञों के समय गाए जाने वाले मंत्रों का संकलन है।
- यजुर्वेद (Yajurveda): यह गद्य और पद्य (Prose & Poetry) दोनों में लिखा गया एकमात्र वेद है। इसमें यज्ञों के नियम और धार्मिक विधियों का संकलन है।
- अथर्ववेद (Atharvaveda): यह सबसे नवीन वेद है, जिसकी रचना अथर्वा ऋषि ने की थी। इसमें तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, भूत-प्रेत, वशीकरण, औषधि अनुसंधान और विवाह संबंधी गीतों का समावेश है।
- उपनिषद (Upanishads): इन्हें 'वेदांत' भी कहा जाता है, जिनकी कुल संख्या 108 है। ये भारतीय दर्शन (Philosophy) के मुख्य स्रोत हैं। भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' Mundaka Upanishad (मुण्डकोपनिषद) से लिया गया है।
| भारतीय दर्शन (दर्शन शास्त्र) | प्रवर्तक / संस्थापक ऋषि | मूल सिद्धांत / परीक्षा बिंदु |
|---|---|---|
| सांख्य दर्शन (Samkhya) | कपिल मुनि (Kapila) | भारत का सबसे प्राचीन दर्शन। जगत की उत्पत्ति प्रकृति और पुरुष के संयोग से मानती है। |
| योग दर्शन (Yoga) | महर्षि पतंजलि (Patanjali) | चित्त की वृत्तियों के निरोध (अष्टांग योग) द्वारा मोक्ष प्राप्ति की वकालत। |
| न्याय दर्शन (Nyaya) | महर्षि गौतम (Gautama) | तर्क और प्रमाण के आधार पर सत्य की खोज (भारतीय तर्कशास्त्र का आधार)। |
| वैशेषिक दर्शन (Vaisheshika) | महर्षि कणाद / उलूक (Kanada) | परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory) के जनक। संसार की सभी वस्तुओं को पंचमहाभूतों में विभाजित किया। |
| पूर्व मीमांसा (Purva Mimamsa) | महर्षि जैमिनी (Jaimini) | वेदों के कर्मकांडीय भाग का समर्थन और धर्म की व्याख्या। |
| उत्तर मीमांसा / वेदांत (Vedanta) | बादरायण (Badarayana) | ब्रह्म और आत्मा की एकता का प्रतिपादन। बाद में आदि शंकराचार्य ने 'अद्वैतवाद' का प्रचार किया। |
3. बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म का ऐतिहासिक तुलनात्मक विश्लेषण
छठी शताब्दी ई.पू. में उत्तर भारत में जटिल कर्मकांडों, बलि प्रथा और जाति प्रथा के विरोध में एक महान धार्मिक-वैचारिक क्रांति हुई, जिसके फलस्वरूप 62 नास्तिक संप्रदायों का उदय हुआ। इनमें बौद्ध धर्म और जैन धर्म सबसे महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक सिद्ध हुए।
☸️ बौद्ध धर्म (Buddhism)
संस्थापक: गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ), जिन्हें 'एशिया का ज्योति पुंज' (Light of Asia) कहा जाता है। जन्म 563 ई.पू. लुम्बिनी (नेपाल) में, महापरिनिर्वाण 483 ई.पू. कुशीनगर (यूपी) में हुआ।
चार आर्य सत्य (Four Noble Truths): (1) संसार दुखमय है (सर्वं दुःखम्), (2) दुःख का कारण तृष्णा/इच्छा है (दुःख समुदाय), (3) दुःख निवारण संभव है (दुःख निरोध), (4) दुःख निवारण का मार्ग 'अष्टांगिक मार्ग' (Eightfold Path) है। अष्टांगिक मार्ग को भिक्षुओं का कल्याण मित्र कहा जाता है।
मुख्य दार्शनिक आधार: 'क्षणिकवाद' (संसार में सब कुछ परिवर्तनशील है) और 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (कारण-कार्य का सिद्धांत, यानी किसी भी घटना के पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है)। यह अनिश्वरवादी (भगवान को न मानने वाला) और अनात्मवादी (आत्मा को न मानने वाला) दर्शन है, परंतु पुनर्जन्म (Rebirth) में विश्वास करता है।
त्रिरत्न: बुद्ध, धम्म और संघ।
💎 जैन धर्म (Jainism)
संस्थापक: प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) थे। वास्तविक संस्थापक 24वें तीर्थंकर वर्धमान महावीर को माना जाता है। जन्म 540 ई.पू. कुंडग्राम (वैशाली) में, निर्वाण 468 ई.पू. पावापुरी में हुआ।
पंच महाव्रत: (1) अहिंसा (हिंसा न करना), (2) सत्य (झूठ न बोलना), (3) अस्तेय (चोरी न करना), (4) अपरिग्रह (संपत्ति अर्जित न करना), और (5) ब्रह्मचर्य (इंद्रिय निग्रह)। ब्रह्मचर्य को महावीर स्वामी ने जोड़ा था, जबकि प्रथम चार पार्श्वनाथ (23वें तीर्थंकर) द्वारा दिए गए थे।
मुख्य दार्शनिक आधार: 'स्यादवाद' या 'अनेकांतवाद' (Saptabhangi Naya) - सत्य के बहुआयामी होने का सिद्धांत। यह अनिश्वरवादी दर्शन है लेकिन बौद्ध धर्म के विपरीत 'आत्मा' (Soul) के अस्तित्व को स्वीकार करता है और मानता है कि पत्थरों और कणों में भी जीव होता है। इसी कारण जैन धर्म में कृषि और युद्ध वर्जित थे क्योंकि इनमें सूक्ष्म जीवों की हिंसा होती है।
त्रिरत्न: सम्यक् दर्शन (सच्ची श्रद्धा), सम्यक् ज्ञान (सच्चा ज्ञान), सम्यक् आचरण (सच्चा चरित्र)।
⭐ परीक्षा का सबसे पसंदीदा हॉटस्पॉट: चार बौद्ध संगीतियाँ (Buddhist Councils)
| संगीति (Council) | समय (Time) | स्थान (Venue) | अध्यक्ष (President) | शासक (Ruler) | मुख्य परिणाम / विशेषता |
|---|---|---|---|---|---|
| प्रथम | 483 ई.पू. | राजगृह (सप्तपर्णी गुफा) | महाकस्सप | अजातशत्रु (हर्यक वंश) | बुद्ध के उपदेशों को 'सुत्तपिटक' (आनंद द्वारा) और 'विनयपिटक' (उपालि द्वारा) में संकलित किया गया। |
| द्वितीय | 383 ई.पू. | वैशाली | साबाकामी (सर्वकामनी) | कालाशोक (शिशुनाग वंश) | बौद्ध संघ में पहला विभाजन हुआ - 'स्थविर' और 'महासंधिक'। |
| तृतीय | 250 ई.पू. | पाटलिपुत्र | मोग्गलिपुत्त तिस्स | अशोक (मौर्य वंश) | तीसरा पिटक 'अभिधम्मपिटक' (दार्शनिक व्याख्या) जोड़ा गया। विदेशों में बौद्ध धर्म का प्रचार शुरू। |
| चतुर्थ | प्रथम शताब्दी (72 ई.) | कुंडलवन (कश्मीर) | वसुमित्र (उपाध्यक्ष: अश्वघोष) | कनिष्क (कुषाण वंश) | बौद्ध धर्म का पूर्णतः दो संप्रदायों में विभाजन हुआ - 'हीनयान' और 'महायान'। संस्कृत को मुख्य भाषा बनाया गया। |
🔥 बौद्ध संगीति याद रखने के अचूक सूत्र (Super Tricks):
1. शासक याद रखने की ट्रिक: "अ-का-अ-क" ➔ अजातशत्रु, कालाशोक, अशोक, कनिष्क।
2. स्थान याद रखने की ट्रिक: "रा-वै-पा-कु" ➔ राजगृह, वैशाली, पाटलिपुत्र, कुंडलवन।
3. अध्यक्ष याद रखने की ट्रिक: "म-सा-मो-व" ➔ महाकस्सप, साबाकामी, मोग्गलिपुत्त तिस्स, वसुमित्र।
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